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ड्रैगन का डिजिटल चक्रव्यूह!..खतरे में हिंदुस्थान की सुरक्षा…डेटा इकट्ठा करने वाली मशीनें हैं चीनी गाड़ियां

सामना संवाददाता / नई मुंबई

जहां एक ओर दुनिया की महाशक्ति अमेरिका ने चीनी कनेक्टेड गाड़ियों और हार्डवेयर पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी कर ली है, वहीं हिंदुस्थान में एक खामोश खतरा हमारे बेडरूम से लेकर देश की सरहदों तक पैठ बना चुका है। अमेरिका ने जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा का आपातकाल घोषित किया है, हिंदुस्थान में उसे सस्ते विकल्प के नाम पर रेड कारपेट बिछाकर स्वागत किया जा रहा है।
अमेरिकी सीनेटरों की चेतावनी साफ है कि चीनी गाड़ियां सिर्फ वाहन नहीं, बल्कि डेटा इकट्ठा करने वाली मशीनें हैं। हिंदुस्थान में भी इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जिनमें चीनी कंपोनेंट्स और सॉफ्टवेयर की भरमार है। आपकी लोकेशन, बातचीत और ड्राइविंग पैटर्न का रियल-टाइम डेटा विदेशी सर्वरों पर जा सकता है। साइबर स्ट्राइक की स्थिति में इन वाहनों को रिमोट कंट्रोल के जरिए बीच सड़क पर जाम किया जा सकता है या नियंत्रित किया जा सकता है।
गौरतलब हो कि पिछले दिनों एक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हिंदुस्थान के सरकारी दफ्तरों और संवेदनशील इलाकों में लगे चीनी सीसीटीवी वैâमरे डेटा लीक कर रहे हैं। ये वैâमरे बैकडोर एंट्री के जरिए हैकर्स को एक्सेस देते हैं। रणनीतिक खतरा यह है कि सैन्य ठिकानों के पास लगे ये वैâमरे हिंदुस्थान की सुरक्षा तैयारियों की लाइव फीड सीमा पार भेज सकते हैं! चीन जान-बूझकर हिंदुस्थान में अपने उत्पाद जैसे घड़ी, मोबाइल और टीवी को उत्पादन लागत से भी कम दाम पर डंप कर रहा है। इसका मुख्य मकसद हिंदुस्थानी मैन्युपैâक्चरिंग यूनिट्स को दिवालिया करना है ताकि भविष्य में हिंदुस्थान पूरी तरह से चीन पर निर्भर हो जाए। अमेरिका के आरोप बताते हैं कि चीनी कंपनियां जबरन मजदूरी कराकर कीमतें घटाती हैं, जिससे अमेरिकी श्रमिक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं। यह गणित हिंदुस्थान में भी लागू होता है।
कड़े कानून बनाने की जरूरत
डेमोक्रेटिक सीनेटर डेबी डिंगेल की अमेरिका के संदर्भ में दी गई चेतावनी, हिंदुस्थान पर भी उतनी ही फिट बैठती है। अगर आज हमने कड़े कानून नहीं बनाए, तो हमारी आने वाली पीढ़ियां एक खोखले मैन्युपैâक्चरिंग बेस और लचर सुरक्षा तंत्र की विरासत पाएंगी। जब अमेरिका जैसा तकनीक-संपन्न देश चीन को बाहर का रास्ता दिखा सकता है तो हिंदुस्थान सस्ते के लालच में अपनी संप्रभुता को दांव पर क्यों लगा रहा है? सतर्क रहिए, क्योंकि सुरक्षा पर सेंध का मसला सिर्फ सरहदों पर नहीं, आपकी जेब में रखे मोबाइल और गैरेज में खड़ी गाड़ी में भी है।

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