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कल्याण में नाबालिग के साथ दिंरदगी ने खोली रेलवे की पोल…रेल परिसर में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल

जेदवी / मुंबई

मुंबई की लाइफलाइन कही जानेवाली लोकल रेल अब महिलाओं और बच्चियों के लिए भय का केंद्र बनती जा रही हैं। हाल ही में कल्याण रेलवे स्टेशन और यार्ड क्षेत्र में १४ वर्षीय नाबालिग के साथ हुई दरिंदगी की घटना ने रेल परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी पोल खोल दी है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर एक नाबालिग को व्यस्त स्टेशन क्षेत्र से अगवा कर प्रतिबंधित रेलवे यार्ड तक कैसे ले जाया गया और सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
इस घटना के बाद यात्रियों और स्थानीय नागरिकों में जबरदस्त आक्रोश है।
लोगों का कहना है कि रेल प्रशासन सिर्फ दावे और अभियानों का ढोल पीट रहा है, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह भयावह बन चुकी है। स्टेशन परिसरों, प्लेटफॉर्मों और यार्ड क्षेत्रों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़, स्नैचिंग और गंभीर अपराधों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
यात्रियों का आरोप है कि कई स्टेशनों पर सुरक्षाकर्मी गश्त करने के बजाय मोबाइल फोन में व्यस्त दिखाई देते हैं। रात के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब कई स्टेशनों पर केवल एक कांस्टेबल के भरोसे पूरी सुरक्षा व्यवस्था चलाई जाती है। अंधेरे प्लेटफॉर्म, सुनसान फुटओवर ब्रिज और यार्ड क्षेत्रों में अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
रेलवे परिसरों में बुनियादी सुरक्षा सुविधाओं की भी भारी कमी सामने आई है। कई स्टेशनों पर पर्याप्त रोशनी नहीं है, सीसीटीवी कैमरे नाकाफी हैं और प्रवेश-निकास बिंदुओं पर प्रभावी निगरानी का अभाव है। यही कारण है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
पहले की घटनाएं
फरवरी २०२६ में घाटकोपर के पास एक व्यक्ति कथित तौर पर बुर्का पहनकर महिलाओं के डिब्बे में घुस गया और छेड़छाड़ की कोशिश कर फरार हो गया। वहीं दादर स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय एक महिला के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई, जहां आरोपी ने ट्रेन शुरू होते ही महिला को गलत तरीके से छुआ। बाद में यात्रियों की मदद से आरोपी को ठाणे जीआरपी के हवाले किया गया। अप्रैल २०२६ में ठाणे और डोंबिवली के बीच चलती ट्रेन में महिलाओं के बीच हिंसक मारपीट का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसने रेल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
जनवरी २०२६ में १७४ विनयभंग और ८० दुष्कर्म के मामले
मुंबई पुलिस के हालिया आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं। जनवरी २०२६ में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के ५१५ मामले दर्ज किए गए, जिनमें १७४ विनयभंग और ८० दुष्कर्म के मामले शामिल हैं। पुलिस भले ही ७९ प्रतिशत डिटेक्शन रेट का दावा कर रही हो, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं इन दावों की सच्चाई बयान कर रही हैं।

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