रोहित माहेश्वरी लखनऊ
लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर चलाना और विरोध कर रहे अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज करना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है। सवाल यह नहीं है कि निर्माण वैध थे या अवैध, सवाल यह है कि क्या सरकार कानून के संरक्षकों के साथ भी वही व्यवहार करेगी, जो वह आम जनता के साथ करती आई है? बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए चैंबर तोड़ देना और फिर आवाज उठाने पर लाठियां बरसाना सत्ता के अहंकार को दर्शाता है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि जब अधिवक्ता ही अन्याय का शिकार होंगे तो आम नागरिक को न्याय वैâसे मिलेगा। यह सवाल केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा से जुड़ा हुआ प्रश्न है। भाजपा सरकार पर लगातार यह आरोप लगता रहा है कि बुलडोजर अब कानून का नहीं, राजनीतिक संदेश का प्रतीक बन चुका है। विपक्षी आवाजों, गरीबों, व्यापारियों और अब वकीलों तक पर कार्रवाई ने यह धारणा मजबूत की है कि सत्ता संवाद नहीं, दमन का रास्ता चुन रही है। अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज ने न्यायपालिका और प्रशासन के बीच अविश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है। अगर सरकार वास्तव में कानून के शासन में विश्वास करती है, तो उसे संवेदनशीलता, संवाद और न्यायपूर्ण समाधान का रास्ता अपनाना होगा, न कि भय और बल प्रयोग का।
महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का सड़क संग्राम
रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस ने रविवार को उत्तर प्रदेश के कई जिलों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के आह्वान पर गाजीपुर, शामली, अमरोहा, इटावा, श्रावस्ती, गाजियाबाद, बिजनौर, फतेहपुर, संभल, गोरखपुर, हापुड़, मऊ, मुरादाबाद, प्रयागराज और बुलंदशहर समेत अनेक जिलों में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। उनका कहना था कि पेट्रोलियम पदार्थों और घरेलू गैस के दामों में लगातार वृद्धि से मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है। प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘जनता की जेब पर खुला डाका’ बताते हुए महंगाई को जनविरोधी नीति का परिणाम करार दिया। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
मायावती की बड़ी नसीहत
बसपा अध्यक्ष मायावती ने देश के मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक हालात को लेकर एक गंभीर और संदेशात्मक सोशल मीडिया पोस्ट किया है। उन्होंने भारत की पहचान को संविधान, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक भाईचारे से जोड़ते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत सभी धर्मों और वर्गों को समान सम्मान देने की परंपरा रही है। मायावती ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सुरक्षा कवच है। मायावती ने पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा और देश के विभिन्न हिस्सों में बढ़ती सामाजिक कटुता का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी केवल कानून बनाना नहीं, बल्कि उसे निष्पक्षता के साथ लागू करना भी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून का उपयोग किसी धार्मिक, जातीय या राजनीतिक भेदभाव के बिना होना चाहिए, तभी जनता का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था में बना रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी सरकार पर पक्षपात या संकीर्ण राजनीति के आरोप लगते हैं तो इससे उसकी संवैधानिक छवि और विश्वसनीयता प्रभावित होती है। बसपा अध्यक्ष ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि देश इस समय बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक दबाव और सामाजिक असुरक्षा जैसी गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में सरकारों को इन ज्वलंत मुद्दों पर पूरी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक दलों को सलाह देते हुए कहा कि विवादों, तनाव और विभाजनकारी राजनीति के जरिए जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने की कोशिश देशहित में नहीं मानी जा सकती। मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में सामाजिक सौहार्द, कानून व्यवस्था और राजनीतिक ध्रुवीकरण को लेकर लगातार बहस चल रही है। उनके इस पोस्ट को विपक्ष की ओर से सरकारों के लिए एक राजनीतिक संदेश और संवैधानिक मूल्यों की याद दिलाने वाली अपील के रूप में देखा जा रहा है।
