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गडकरी को आया ‘गुस्सा’…होर्मुज में अटके केले!..ब्लॉकेड से ४०० कंटेनरों का कृषि उत्पाद हुआ बेकार… परिवार को करोड़ों का नुकसान

सुनील ओसवाल / मुंबई

मध्य पूर्व में बढ़ते अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब भारतीय कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खुद खुलासा किया है कि इस युद्ध जैसे माहौल ने उनके परिवार के व्यवसाय को भी भारी नुकसान पहुंचाया। सैकड़ों कंटेनर रास्ते में फंस गए। इनमें ४०० कंटेनर केले भी फंस गए थे, जो सड़ गए। माल खराब होने से करोड़ों रुपए का झटका लगा।
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में गडकरी ने बताया कि उनके परिवार का डिटर्जेंट निर्माण का कारोबार है, जिसकी जिम्मेदारी उनकी बहू संभालती हैं। हर महीने करीब १०० कंटेनर अमेरिका भेजे जाते थे, लेकिन मध्य पूर्व संकट के बाद अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई। जहाजों की आवाजाही रुक गई और कंटेनर बीच रास्ते में ही अटक गए। गडकरी ने कहा कि हालात इतने खराब हो गए थे कि ‘पूरा धंधा बैठ गया था।’ बाद में स्थानीय बाजारों में माल बेचकर कारोबार को संभालने की कोशिश करनी पड़ी।
आयात-निर्यात का है कारोबार
उन्होंने यह भी बताया कि उनके बेटे का फल निर्यात-आयात कारोबार भी युद्ध की मार से नहीं बच पाया। भारत से ईरान भेजे गए करीब ४०० कंटेनर केले रास्ते में फंस गए, जिससे पूरा माल खराब हो गया।
२०० कंटेनर सेब अटके
गडकरी ने बताया कि ईरान से आने वाले करीब २०० कंटेनर सेब भी बंदरगाहों और ट्रांजिट में अटक गए। इस पूरी स्थिति में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ और सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई। गडकरी ने बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा नुकसान होने के बावजूद बीमा क्लेम मिलने में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
नए रास्ते खोजना ही असली उद्यमिता
निर्यात के दौरान सामान खराब होने पर बीमा कंपनियां दावों को लटकाकर व्यापारियों की परेशानी बढ़ा रही हैं। यह बात केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कही। युद्ध, अंतर्राष्ट्रीय अस्थिरता और बंदरगाहों पर संकट का सबसे बड़ा असर उद्योग और व्यापार क्षेत्र पर पड़ रहा है। हालांकि, मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने उद्यमियों को हार न मानने की सलाह दी। गडकरी ने कहा कि कारोबार में संघर्ष और उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन परिस्थितियों के हिसाब से नए बाजार और नए रास्ते तलाशना ही असली उद्यमिता है।

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