मुख्यपृष्ठनए समाचारपाकिस्तान ने चीन से मांगी थी परमाणु हमलावर पनडुब्बी!

पाकिस्तान ने चीन से मांगी थी परमाणु हमलावर पनडुब्बी!

-‘लीक दस्तावेजों’ से उजागर हुई पाकिस्तान की खूनी मंशा

-ग्वादर के बदले चाहता था हिंदुस्थान के खिलाफ सेकेंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी

सामना संवाददाता / मुंबई

पाकिस्तान की हिंदुस्थान विरोधी खतरनाक साजिश का बड़ा खुलासा हुआ है। लीक हुए कुछ गोपनीय दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान ने वर्ष २०२४ में चीन से ऐसी परमाणु हमला करनेवाली पनडुब्बी मांगी थी, जिससे वह परमाणु हमला होने की सूरत में समुद्र से जवाबी हमला कर सके। पाकिस्तान ने चीन से समुद्र आधारित ‘सेकेंड स्ट्राइक’ परमाणु क्षमता देने की मांग की थी, लेकिन चीन ने भी इस मांग को ‘अव्यावहारिक’ बताते हुए ठुकरा दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान चाहता था कि चीन उसे परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस पनडुब्बी तकनीक उपलब्ध कराए।
गोपनीय सैन्य तकनीक
यह दुनिया की सबसे गोपनीय और संवेदनशील सैन्य तकनीकों में गिनी जाती है। ऐसी पनडुब्बियां समुद्र के भीतर लंबे समय तक छिपी रह सकती हैं और दुश्मन के पहले परमाणु हमले के बाद भी जवाबी हमला करने में सक्षम होती हैं।
तो पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह बन जाता चीन का स्थायी सैन्य अड्डा!
पाकिस्तान ने चीन से परमाणु हमला करनेवाली पनडुब्बी मांगी थी। वह हिंदुस्थान के खिलाफ इसका इस्तेमाल करना चाहता था। पाकिस्तान यह क्षमता हासिल कर हिंदुस्थान के खिलाफ अपनी परमाणु ताकत बढ़ाना चाहता था। इसके बदले पाकिस्तान ने चीन को ग्वादर बंदरगाह को स्थायी चीनी सैन्य अड्डे में बदलने का प्रस्ताव दिया था। ग्वादर बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक माना जाता है।
लीक दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान ने चीन के सामने कई शर्तें भी रखीं। पाकिस्तान चाहता था कि अगर ग्वादर को आधिकारिक रूप से चीनी सैन्य बेस बनाया जाता है तो अमेरिका की ओर से होने वाले राजनीतिक, आर्थिक या कूटनीतिक दबाव से चीन उसकी रक्षा करे। साथ ही पाकिस्तान ने हिंदुस्थान के खिलाफ सैन्य प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए चीन से व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण सहायता भी मांगी थी। हालांकि, चीन ने पाकिस्तान की इस मांग को खारिज कर दिया। दुनिया में केवल कुछ ही देशों के पास समुद्र आधारित परमाणु सेकेंड स्ट्राइक क्षमता मौजूद है। अमेरिका, रूस, चीन, प्रâांस, ब्रिटेन और हिंदुस्थान इस सूची में शामिल हैं। हिंदुस्थान ने अपनी स्वदेशी ‘अरिहंत’ श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों के जरिए यह क्षमता विकसित की है। वहीं पाकिस्तान अब तक इस क्षेत्र में काफी पीछे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खुलासा पाकिस्तान की दीर्घकालिक सैन्य मंशा और चीन पर उसकी बढ़ती निर्भरता को सामने लाता है।

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