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`डॉक्टर साहब, पीछे के बाल तो ठीक हैं, लेकिन आगे की हेयरलाइन बहुत पीछे जा चुकी है। क्या डेंसिटी अच्छी आ जाएगी? मुझे ऐसा लुक चाहिए, जो एकदम नेचुरल लगे और कोई पहचान न पाए।’
श्रीनगर के एक पॉश कॉस्मेटिक क्लीनिक के आईने के सामने बैठा वह युवक डॉक्टर से बड़े सामान्य लहजे में अपनी गिरती जुल्फों का दर्द बयां कर रहा था। डॉक्टर को अंदाजा भी नहीं था कि स्वैâल्प की जांच करा रहा यह बेहद सजग और अपनी खूबसूरती को लेकर फिक्रमंद युवक कोई आम कश्मीरी नहीं, बल्कि सरहद पार से आया लश्कर-ए-तैयबा का खतरनाक आतंकी उस्मान जट्ट उर्फ ‘चीनी’ है। जिसे पाकिस्तान से भारत में स्लीपर सेल का नेटवर्क खड़ा करने का बड़ा मिशन सौंपा गया था, वह भारत पहुंचते ही अपनी गिरती जुल्फों के जंजाल में ऐसा उलझा कि देश के खिलाफ साजिश रचने के बजाय सीधे हेयर ट्रांसप्लांट कराने क्लीनिक पहुंच गया। यही लापरवाही आखिरकार उसकी गिरफ्तारी का सबसे बड़ा सबब बन गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों द्वारा पहचान छिपाने या निजी असुरक्षा के कारण आधुनिक चिकित्सा का सहारा लेने का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। मार्च में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किए गए एक अन्य आतंकी, शब्बीर अहमद लोन ने भी बांग्लादेश में लश्कर का नेटवर्क खड़ा करने के दौरान गुरुग्राम के एक निजी क्लीनिक में दांतों का महंगा इलाज कराया था। लोन के मॉड्यूल ने ही दिल्ली में आयोजित एआई समिट से ठीक पहले भड़काऊ पोस्टर लगाए थे। दिल्ली पुलिस जल्द ही अदालत में दाखिल होने वाली चार्जशीट में इन चिकित्सा उपचारों और उनसे जुड़े तथ्यों का विस्तार से उल्लेख करने जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन आतंकियों की प्रेरणा २६/११ हमले के मुख्य साजिशकर्ता साजिद मीर और कुख्यात अंतर्राष्ट्रीय अपराधी ‘कार्लोस द जैकल’ से जुड़ी हो सकती है। इन अपराधियों ने अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणालियों और एयरपोर्ट चेकिंग को चकमा देने के लिए प्लास्टिक सर्जरी के जरिए अपने चेहरे और हुलिए पूरी तरह बदल लिए थे, ताकि वे फर्जी पासपोर्ट के सहारे आसानी से सीमाएं पार कर सकें।
इतिहास खंगालें तो हुलिया बदलने का यह शातिर पैंतरा लिट्टे के दौर में भी देखा गया था, जब संगठन के कई शीर्ष कमांडरों ने भारतीय और श्रीलंकाई सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अपनी मूंछें मुंडवा ली थीं और चेहरे की बनावट बदलने के लिए स्थानीय क्लीनिकों की मदद ली थी। इसी तरह, पंजाब में आतंकवाद के दौर में भी कई वांटेड आतंकियों ने अपनी दाढ़ी-मूंछ और पारंपरिक हुलिया बदला था, ताकि वे आम नागरिकों के बीच छिप सकें।
पूछताछ के दौरान उस्मान जट्ट ने कबूल किया कि तेजी से झड़ते बालों की वजह से उसका आत्मविश्वास टूट चुका था। रोजमर्रा की जिंदगी के तनाव ने उसके भीतर के उस कट्टरपंथी जोश को खत्म कर दिया था, जो उसे ट्रेनिंग वैंâपों में भरा गया था। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार गहरी निजी असुरक्षा और मानसिक दबाव, आतंकी संगठनों द्वारा किए गए ब्रेनवॉश पर भी भारी पड़ जाते हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां इसे सिर्फ एक आतंकी का निजी शौक मानकर खारिज नहीं कर रही हैं। कॉस्मेटिक सर्जरी और हुलिया बदलना अब अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को अवैध रूप से पार करने और सुरक्षा चक्र को भेदने की एक सोची-समझी रणनीति बनती जा रही है, जिस पर अब खुफिया निगरानी और कड़ी कर दी गई है।
