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महायुति में ‘सत्ता संग्राम’…सीटों से ज्यादा महामंडलों पर महाभारत!

-शिंदे की अचानक दिल्ली दौड़ से महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज महायुति के भीतर अब खुला ‘पावर वॉर’ शुरू हो चुका है। विधान परिषद की १७ सीटों के एलान ने भाजपा, शिंदे गुट और अजीत पवार गुट के बीच दबे संघर्ष को विस्फोटक बना दिया है। लेकिन असली लड़ाई सिर्फ विधान परिषद सीटों की नहीं, बल्कि सत्ता के ‘मलाईदार महामंडलों’ की बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ‘वर्षा’ बंगले पर हुई भाजपा की हाईवोल्टेज बैठक में महामंडलों के बंटवारे का ऐसा फॉर्मूला तैयार किया गया, जिसने सहयोगी दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इसी बीच उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का अचानक दिल्ली रवाना होना, राजनीतिक गलियारों में बड़े तूफान का संकेत माना जा रहा है।
शिंदे गुट की सबसे बड़ी चिंता अब विधान परिषद नहीं, बल्कि अपने नेताओं को ‘सेट’ करने की बताई जा रही है। विधानसभा चुनाव और आने वाले महापालिका चुनावों में दर्जनों नेताओं, पूर्व नगरसेवकों और समर्थकों को सत्ता में भागीदारी के आश्वासन दिए गए थे। अब अगर महामंडलों में अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिली, तो शिंदे गुट में अंदरूनी असंतोष फूटने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि कई नेता पहले ही ‘वेटिंग मोड’ में हैं और दिल्ली तक संदेश पहुंचाया गया है कि अगर सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं मिली, तो संगठनात्मक असर दिख सकता है।
अमित शाह से ‘सत्ता फॉर्मूले’ पर चर्चा?
हालांकि आधिकारिक तौर पर शिंदे का दिल्ली दौरा नगरविकास विभाग की बैठक बताया जा रहा है, लेकिन सत्ता के गलियारों में चर्चा कुछ और ही है। कहा जा रहा है कि शिंदे सीधे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर भाजपा के सामने अपनी राजनीतिक ताकत और दबाव दोनों दिखाने की कोशिश करेंगे।
‘वर्षा’ पर चली सत्ता की गुप्त रणनीति
मुख्यमंत्री फडणवीस के सरकारी निवास ‘वर्षा’ पर भाजपा कोर कमिटी की बैठक को लेकर भी कई चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा अब महायुति में ‘बड़े भाई’ की भूमिका पूरी तरह लागू करने के मूड में है।
शिंदे गुट में घमासान!..भाजपा की ‘डच्चू लिस्ट’ से कई मंत्रियों की कुर्सी खतरे में
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व अब सरकार की छवि सुधारने के लिए सख्त मूड में है। बार-बार विवादित बयान देकर सरकार को मुश्किल में डालने वाले कुछ मंत्रियों की गोपनीय रिपोर्ट तैयार की गई है। इन मंत्रियों की बयानबाजी से भाजपा नेतृत्व खासा नाराज बताया जा रहा है। यही वजह है कि अब मंत्रिमंडल विस्तार को ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तरह देखा जा रहा है।

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