मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : ईरान ने बदली चाल... इजरायल में घुसकर क्यों मारा?

मुस्लिम वर्ल्ड : ईरान ने बदली चाल… इजरायल में घुसकर क्यों मारा?

सूफी खान

रविवार-सोमवार यानी ७-८ जून की दर्मियानी रात ईरान ने जिस तरह से इजरायल पर पहले और सीधे हमला किया है, वो नए संकेत दे रहा है। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि यह बात आकलन के लिए काफी है कि ईरान के अंदर एक निर्णायक और १९७९ की क्रांति के सिद्धांतों का सख्ती से पालन करने वाली सरकार आ गई है। ईरान के इस अंदाज और आक्रामकता को देख लग रहा है कि सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने पूरी तरह टेकओवर ले लिया है। इस वक्त एक बार फिर आईआरजीसी ईरान में बेहद ताकतवर हो गई है। अब तक ज्यादातर देखा गया था कि ईरान ने खुद पर हुए अमेरिका और इजरायल के हमलों पर पलटवार ही किया है। ये पहला मौका था जब ईरान ने सीधे इजरायल पर पहला अटैक कर दिया।
इससे ये भी साफ हो गया कि ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन की रिजीम अपने रजिस्टेंस को जिन्हें वो प्रतिरोध की धुरी बताते हैं, अकेला नहीं छोड़ेगी। कहा जा रहा है कि अब आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई के ईरान के सुप्रीम लीडर बनने के बाद वहां अंदरूनी सियासत में भी तेजी से बदलाव आया है,और एक बार फिर सरकार पर रिजीम हावी हो चुकी है। आईआरजीसी जो सिर्फ अपने सुप्रीम लीडर के प्रति जवाबदेह है।
एक्सपर्ट मानते हैं कि अब खुद आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई फ्रंट पर आकर लीड कर रहे हैं। ईरान अपने अलायंस यानी प्रतिरोध की धुरी के साथ खुल कर खड़ा हो गया है। ईरान, इजरायल को ये दिखाने की कोशिश कर रहा है कि अगर तुम करोगे तो हम भी करेंगे। यही वजह भी रही कि इधर हिजबुल्लाह के लिए ईरान ने इजरायल पर हमला कर दिया, उधर ईरान के समर्थन में उसके दूसरे प्रॉक्सी हूती ने लाल सागर पर पहरा बैठा दिया और इस समुद्री रास्ते को ब्लाक करने का एलान कर दिया। ये कार्डिनेशन दिखाता है कि ईरान में मौजूदा नेतृत्व पूरी रणनीति के साथ लंबी और आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है और अब इजरायल की आक्रामकता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।

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