जो महाराष्ट्र में हुआ, वही पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ हो रहा है। कहानी, पटकथा और निर्देशन वही है; बस किरदारों के नाम बदल गए हैं। तृणमूल कांग्रेस के ६० विधायकों ने पहले ही ममता ‘दीदी’ का त्याग कर एक स्वतंत्र गुट बना लिया और अब २० सांसदों ने बगावत करके भाजपा के साथ जाने का रुख अख्तियार कर लिया है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल २८ सांसद हैं। उनमें से दो-तिहाई यानी २० सांसदों ने बगावत (बेईमानी) कर दी और दावा ठोक दिया कि ‘असली तृणमूल कांग्रेस हम ही हैं’। बेईमानों और गद्दारों को ‘बागी’ कहने की यह नई संस्कृति भाजपा के दौर में शुरू हुई है। दिल्ली में जब ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल हो रही थीं, ठीक उसी वक्त भाजपा के लोग तृणमूल सांसदों को तोड़ने के धंधे में लगे हुए थे। मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के बारह साल पूरे होने यानी एक ‘तप’ पूरा होने के मौके पर उन्होंने देश के लोकतंत्र को मानो यही तोहफा दिया है। महाराष्ट्र वाली वॉशिंग मशीन उठाकर पश्चिम बंगाल ले जाई गई और वहां के सारे भ्रष्ट तृणमूल नेताओं को उस मशीन में डाल दिया। विधानसभा चुनाव के नतीजों को बमुश्किल एक महीना बीता है और देखते ही देखते पूरी तृणमूल भाजपा में शामिल होती दिख रही है। आश्चर्य की बात यह है कि कल तक इसी तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल को लूटा, भ्रष्टाचार किया और गुंडागर्दी की, यह भाजपा का पक्का मानना था और आज भी है। चुनाव प्रचार में तृणमूल को हिंदू-विरोधी और बांग्लादेशियों की मददगार बताया गया। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने चीख-चीखकर यह बात कही थी और वादा किया था कि भाजपा की सरकार आते ही इन सारे मुद्दों को खत्म कर दिया जाएगा। लेकिन अब
‘भ्रष्ट’ और ‘बांग्लादेशी समर्थक’
तृणमूल कांग्रेस को भाजपा में शामिल करके सारे मुद्दों को रफा-दफा कर दिया गया। भाजपा की सियासत ऐसी ही है। इसमें देश, देशभक्ति या जुबान की पक्की होने की कोई अहमियत नहीं है; अहमियत है तो सिर्फ अपनी कुर्सी और अपनी सत्ता की। भाजपा को भ्रष्टाचार से कोई लेना-देना नहीं है। भ्रष्ट तरीकों से कमाया गया पैसा ही उनका परमेश्वर है। सारे भ्रष्टाचारी अपनी संपत्ति समेत जैसे ही भाजपा में शामिल होते हैं, उनका खेल खत्म हो जाता है। जो ‘बेईमान’ (बागी) आज ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के काम करने के तरीके पर उंगली उठा रहे हैं और शोर मचा रहे हैं कि ममता बनर्जी ने भ्रष्टाचार को शह दी, वे सभी बेईमान भी तो इसी ‘सिस्टम’ से निकले हैं! ममता बनर्जी ने उन्हें पद और प्रतिष्ठा दी और अब जैसे ही पश्चिम बंगाल की सत्ता हाथ से गई, उनके अंदर का ‘पवित्र बागी’ जाग उठा। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हर जगह यही नंगा नाच चल रहा है। मोदी ने ‘कांग्रेसमुक्त भारत’ का नारा दिया था। लेकिन हकीकत में भाजपा ने खुद को कांग्रेस का ही प्रतिरूप बना लिया है। कांग्रेस के भ्रष्ट शासन पर उंगली उठानेवाले ये लोग आज खुद भ्रष्टाचार का वटवृक्ष बन चुके हैं। इस वटवृक्ष के नीचे मोदी बारह सालों से तपस्या में बैठे हैं, लेकिन उन्हें नैतिकता का बोध नहीं हुआ! सत्ता बचाए रखने के लिए ‘फोड़ो, तोड़ो और खरीदो’ यही उनका एकमात्र सिद्धांत है। तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने के लिए खौफ, धमकियां, पैसा और जांच एजेंसियों का खुला इस्तेमाल किया गया। तृणमूल के स्थानीय नेताओं पर हमले हो रहे हैं और उन्हें सरेआम जलील किया जा रहा है। विपक्ष के साथ पेश आने का यह कौन सा तरीका है? इसका जवाब प्रधानमंत्री मोदी को देना चाहिए। यदि मोदी-शाह-शुभेंदु अधिकारी की यह बात सच मान ली जाए कि जनता ने ममता के भ्रष्ट शासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया, तो फिर उस
भ्रष्टाचार का गोबर
अपने बदन पर मलकर यह त्रिमूर्ति क्यों घूम रही है? तृणमूल के एक राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर ने बेईमानी करने के बाद कहा, ‘ममता ने अपने दौर में बंगाल में सिर्फ गंदगी फैलाई। १५ साल तक ममता ने ‘अस्त-व्यस्त’ राज चलाया, इसीलिए विधानसभा चुनाव में उनकी हार हुई।’ ये महाशय ममता की मेहरबानी से चार बार राज्यसभा सांसद बने और हर बार ममता की तारीफ में कसीदे पढ़ते नहीं थकते थे। ममता का राज गुंडों या भ्रष्टाचारियों का राज है, यह इनमें से किसी ने तब नहीं कहा। आज छोड़कर जाने वाले तृणमूल के ये तमाम विधायक और सांसद ममता के नाम पर ही चुनाव जीतकर आए थे। जो छोड़कर गए, उन्होंने सत्ता का पूरा मजा लिया और सत्ता जाते ही भाजपावासी हो गए। अब उन्हें मोदी-शाह-शुभेंदु अधिकारी चरित्रवान भगवान नजर आने लगे हैं। ममता ने संघर्ष से जिस तृणमूल कांग्रेस पार्टी को खड़ा किया, वह इन बेईमानों के हाथ में थाली में परोसकर दे दी जाएगी। मोदी की ‘तपस्या’ के चलते बेईमानों को ये इज्जत और रुतबा मिला है, जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा सभापति, विधानसभा अध्यक्ष, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट ये सब के सब इन बेईमानों की पालकी के कहार बन जाते हैं। मोदी की तपस्या ने देश के बेईमानों को ‘बागी’ का दर्जा दे दिया। क्या गजब का कारनामा है! देश इस तबाही से एक बार फिर उठ खड़ा होगा। ममता बनर्जी को इन बेईमानों के आगे गिड़गिड़ाने की जरूरत नहीं है। जिन्हें जाना है, उन्हें जाने दें। देश में स्वाभिमान और देशभक्ति की नई कोंपलें जरूर फूटेंगी!
