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बारह से नौ, फिर नौ से चार!..‘उज्ज्वला’ पर कम हुआ दुलार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

कभी गरीब परिवारों की रसोई में धुआं हटाने और महिलाओं को राहत देने के नाम पर शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना अब सब्सिडी कटौती के नए दौर में पहुंच गई है। केंद्र सरकार ने उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलने वाले सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलिंडरों की संख्या सालाना नौ से घटाकर सिर्फ चार कर दी है, यानी अब ३०० रुपए की सब्सिडी केवल पहले चार १४.२ किलो वाले सिलिंडरों पर मिलेगी।
यह वही योजना है, जिसके शुरुआती दौर में लाभार्थियों को साल में १२ सब्सिडी वाले सिलिंडरों का लाभ मिलता था। बाद में यह संख्या घटाकर नौ की गई और अब चार तक सीमित कर दी गई है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय उज्ज्वला परिवारों की औसत खपत को देखते हुए लिया गया है। अगस्त २०२५ में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष २०२५-२६ के लिए ३०० रुपए प्रति सिलिंडर की सब्सिडी नौ रिफिल तक जारी रखने की मंजूरी दी थी, लेकिन अब यह सीमा चार सिलिंडरों तक सिमट गई है। सरकार का तर्क है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की लागत बढ़ी है और दिल्ली में सामान्य उपभोक्ता ९४२ रुपए, जबकि उज्ज्वला लाभार्थी सब्सिडी के बाद ६४२ रुपए में सिलिंडर पा रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार सप्लाई लागत १,६०० से अधिक बताई जा रही है। लेकिन आम गरीब परिवार के लिए सवाल अलग है। महंगाई, राशन, बिजली और र्इंधन के बीच रसोई का हिसाब पहले ही बिगड़ा हुआ है। ऐसे में साल में सिर्फ चार सब्सिडी सिलिंडर का मतलब है, बाकी महीनों में या तो महंगा सिलिंडर भरो या फिर पुराने धुएं और चूल्हे की ओर लौटो।

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