मुख्यपृष्ठस्तंभबंगाल में सत्ता पलटी टीएमसी पर जांच एजेंसियों की चढ़ाई

बंगाल में सत्ता पलटी टीएमसी पर जांच एजेंसियों की चढ़ाई

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मंगलवार रात पूर्व सुधार गृह मंत्री और टीएमसी के वरिष्ठ नेता उज्ज्वल बिस्वास की गिरफ्तारी ने इस राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया। नदिया जिले में उनके आवास के बाहर गुस्साई भीड़ ने प्रदर्शन किया और उन पर अंडे फेंके। आरोप है कि सरकारी राहत सामग्री के रूप में रखे गए तिरपालों की हेराफेरी और गबन किया गया। पुलिस ने कोतवाली थाने में दर्ज मामले की जांच के बाद बिस्वास को गिरफ्तार किया।
यह घटना अकेली नहीं है। पिछले कुछ दिनों में टीएमसी से जुड़े कई नेताओं पर पुलिस, एसटीएफ, एनआईए, ईडी और सीआईडी की कार्रवाई हुई है। पूर्व मंत्री सुजीत बोस को ईडी ने नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया। पूर्व विधायक और बिधाननगर नगर निगम के पूर्व चेयरमैन सव्यसाची दत्ता को एक करोड़ रुपए की कथित रंगदारी के मामले में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें भी भीड़ के विरोध और अपमानजनक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा।
फाल्टा क्षेत्र के टीएमसी नेता जहांगीर ‘पुष्पा’ खान को एसटीएफ ने भारत-नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार किया। उन पर रंगदारी और अन्य आपराधिक मामलों के आरोप बताए गए हैं। पूर्व विधायक सौकत मोल्ला को भांगड़ विस्फोट मामले में एनआईए ने गिरफ्तार किया। वहीं सैमसुल इस्लाम, सुजय हाजरा, बाप्पादित्य दासगुप्ता, देबो प्रसाद बाग, राजीव बनर्जी, ब्रह्मानंद मन्ना और संन्यासी मन्ना जैसे स्थानीय नेताओं के नाम भी अलग-अलग मामलों में सामने आए हैं।
इसके अलावा जय प्रकाश मजूमदार, परितोष दत्ता, तपन चट्टोपाध्याय, खोकन दास, असित मजूमदार और तिलक कुमार चक्रवर्ती पर भी विभिन्न आपराधिक, रंगदारी, भ्रष्टाचार या हथियार संबंधी मामलों में कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई है। सुशांत कुमार घोष के फरार होने की बात कही जा रही है। अभिषेक बनर्जी को ईडी और सीआईडी के समन का सामना करना पड़ रहा है, जबकि शाहजहां शेख और पार्थ चटर्जी पहले से ही गंभीर मामलों में जांच और अदालती प्रक्रिया के घेरे में हैं।
इन घटनाओं से साफ है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक जवाबदेही और प्रतिशोध, दोनों की बहस तेज हो गई है। टीएमसी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि नई सत्ता इसे भ्रष्टाचार, हिंसा और स्थानीय दबंगई के खिलाफ अभियान के रूप में पेश कर रही है। सव्यसाची दत्ता और जहांगीर खान की हालिया गिरफ्तारी की पुष्टि अलग-अलग रिपोर्टों में हुई है।

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