अमिताभ श्रीवास्तव
हार्दिक को पैर में मोच आई है, जिसकी वजह से मेडिकल स्टाफ ने उन्हें अगले कुछ दिनों तक किसी भी तरह के खिंचाव या वजन उठाने से बचने की सलाह दी है।
सृष्टि ने यह खिताब केवल आठ रैंकिंग इवेंट्स में प्रतिस्पर्धा करके हासिल किया, जबकि रैंकिंग अधिकतम दस टूर्नामेंट्स के आधार पर गणना की जाती है।
बदकिस्मती का दूसरा नाम हार्दिक पंड्या
इसे कहते हैं बदकिस्मती। या पता नहीं इसके पीछे भी कोई राज हो? जो भी हो, मगर किस्मत से टीम इंडिया में ऐन मौके पर चांस मिला और बदकिस्मती यह कि तुरंत ही चोटिल हो गए और टीम से बाहर। जी हां, यह कहानी है हार्दिक पंड्या की। पूरे करियर में ऐसा ही कुछ चलता आया है हार्दिक के साथ। अब देखिए न अफगानिस्तान के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज से हार्दिक बाहर हो गए हैं। सीरीज से ठीक पहले हार्दिक को चोट लग गई है। एक दिन पहले ही हार्दिक को बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से वनडे सीरीज में खेलने के लिए ग्रीन सिग्नल मिला था, लेकिन २४ घंटे के भीतर वह अब टीम से बाहर हो गए हैं। वे ११ जून को धर्मशाला में टीम इंडिया के साथ जुड़ने वाले थे, लेकिन अचानक लगी चोट के कारण अब ये खिलाड़ी कम से कम दो और सप्ताह बंगलुरु में ही रुकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, हार्दिक को पैर में मोच आई है, जिसकी वजह से मेडिकल स्टाफ ने उन्हें अगले कुछ दिनों तक किसी भी तरह के खिंचाव या वजन उठाने से बचने की सलाह दी है। ऐसे में अब ये देखना बाकी है कि टीम मैनेजमेंट हार्दिक के विकल्प की घोषणा करता है या नहीं। बता दें कि हार्दिक पंड्या लगभग एक साल बाद वनडे में वापसी करने वाले थे।
टेनिस की सृष्टि उम्मीद की किरण
जी हां, नाम ही जिसका सृष्टि किरण हो, वह भारतीय टेनिस की विश्व नंबर एक सृष्टि है और अब एक उम्मीद की नई किरण बन गई है। आईटीएफ वर्ल्ड टेनिस टूर जूनियर्स में अपने सफलतम करियर को बरकरार रखते हुए १३ वर्षीय बंगलुरु की प्रतिभा, सृष्टि किरण ने अंडर-१३ आयु वर्ग में विश्व नंबर १ बनकर एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। यह उपलब्धि उस असाधारण प्रदर्शन के बाद आई है, जिसमें सृष्टि ने लगातार पांच आईटीएफ जूनियर खिताब जीते और पिछले सप्ताह आईटीएफ वर्ल्ड टेनिस टूर जूनियर्स जे१०० ग्वाटेमाला में उपविजेता रहीं। उनकी उल्लेखनीय स्थिरता और सफलता ने उन्हें आईटीएफ जूनियर रैंकिंग में करियर-उच्च ३५७वां स्थान दिलाया, जिससे वह अंडर-१३ श्रेणी में विश्व की उच्चतम रैंकिंग वाली खिलाड़ी बन गईं। सृष्टि ने यह खिताब केवल आठ रैंकिंग इवेंट्स में प्रतिस्पर्धा करके हासिल किया, जबकि रैंकिंग अधिकतम दस टूर्नामेंट्स के आधार पर गणना की जाती है। जिन दो इवेंट्स में वे हिस्सा नहीं ले सकीं, उनका कारण आर्थिक और तार्किक बाधाएं थीं, जिससे उनके अंडर-१३ रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचना और भी उल्लेखनीय हो जाता है। अपने कई करीबी प्रतिद्वंद्वियों से दो कम गणना किए जाने वाले टूर्नामेंटों के बावजूद, इस युवा भारतीय ने अपनी शानदार प्रदर्शन के माध्यम से पर्याप्त अंक जुटाए, ताकि वह अंडर-१३ आयु समूह में विश्व नंबर १ बन सकें।
