मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का: नीट परीक्षा या राष्ट्रीय सुरक्षा ऑपरेशन?

तड़का: नीट परीक्षा या राष्ट्रीय सुरक्षा ऑपरेशन?

कविता श्रीवास्तव

देश में NEET-UG परीक्षा को लेकर हालात कुछ ऐसे बन गए हैं कि अब ये सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि एक हाई-सिक्योरिटी ऑपरेशन जैसा नजर आने लगा है। २१ जून को होने वाली री-एग्जाम को लेकर तैयारियां इतनी सख्त की जा रही हैं कि पहली बार परीक्षा व्यवस्था में एयरफोर्स तक की एंट्री हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, देश के १८ मुख्य केंद्रों पर पेपर पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के श्ग्-१७ हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा सकता है यानी अब सवाल सिर्फ परीक्षा का नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी बन गया है। पेपर तैयार करने से लेकर उसके ट्रांसपोर्ट तक हर स्तर पर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी लगाई गई है। नई टीम, सीक्रेट लोकेशन और पेपर बनाने वालों की लगातार निगरानी सब कुछ इस बार हाई अलर्ट मोड में है।
एग्जाम सेंटरों पर १००ज्ञ् आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, अतिरिक्त मशीनें, प्रशिक्षित स्टाफ, सख्त ड्रेस कोड और एआई आधारित निगरानी सिस्टम होगा यानी तकनीक, सुरक्षा और सिस्टम तीनों को पूरी ताकत से लगाया जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या एक परीक्षा को लेकर हालात इतने जटिल हो जाना सिस्टम की सफलता है या सिस्टम की कमजोरी? जिस परीक्षा का उद्देश्य लाखों छात्रों के भविष्य का मूल्यांकन करना है, वहां अब हेलिकॉप्टर, सेना और सुरक्षा एजेंसियों की जरूरत पड़ रही है। यह अपने आप में गंभीर संकेत है। पिछले कुछ समय में पेपर लीक, गड़बड़ी और विवादों के आरोपों ने हमारी परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कुछ मामलों में छात्रों और अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं और नाराजगी खुलकर सामने आई है। देहरादून में छात्रों के एक समूह ने पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है। इसी माहौल में एक और मामला सामने आया है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने एक छात्र की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जो अपने करियर से जुड़े मुद्दे पर राहत की मांग कर रहा है। कोर्ट ने ण्ँएE को नोटिस भी जारी किया है, यह कहते हुए कि यह सीधे एक छात्र के भविष्य से जुड़ा मामला है। अब तस्वीर कुछ ऐसी बन गई है कि जहां एक तरफ सिस्टम सुरक्षा को मजबूत करने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ सवालों की परतें और गहरी होती जा रही हैं। तो क्या यह वाकई एक एग्जाम है या फिर एक ऐसा सिस्टम टेस्ट, जहां हर बार भरोसा भी उसी सवाल के साथ पास या फेल होता है? जब परीक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए सुरक्षा का इतना बड़ा ढांचा खड़ा करना पड़े तो सवाल सिर्फ पेपर का नहीं रहता, सवाल पूरे सिस्टम का हो जाता है। फिलहाल, देश की निगाहें २१ जून की परीक्षा पर टिकी हैं। साथ ही इस पर भी क्या इस बार नतीजा सिर्फ मार्कशीट में दिखेगा या सचमुच सिस्टम में भी कोई सुधार नजर आएगा।

अन्य समाचार