अनिल मिश्र / रांची
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा एवं उसके समर्थित उम्मीदवार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि यदि नामांकन पत्र में किसी प्रकार की संवैधानिक, कानूनी अथवा प्रक्रियागत त्रुटि पाई गई या आपति दर्ज है तो केवल नामांकन को होल्ड करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश में अपनाई गई प्रक्रिया की तर्ज पर परिमल नाथवानी का नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। यदि मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन आपत्तियों के आधार पर तत्काल रद्द किया जा सकता है, तो झारखंड में परिमल नाथवानी के मामले में अलग प्रक्रिया क्यों अपनाई जा रही है? क्या देश के अलग-अलग राज्यों में चुनावी नियम अलग-अलग हैं? क्या सभी उम्मीदवारों के लिए समान मानदंड लागू नहीं होने चाहिए?
नायक ने कहा कि लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि कानून और नियम सभी पर समान रूप से लागू हों। यदि किसी उम्मीदवार के नामांकन पर आपत्ति दर्ज होने पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाती है, तो उसी प्रकार की आपत्तियों के मामले में समान कसौटी और समान प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। अन्यथा यह धारणा मजबूत होती है कि राजनीतिक प्रभाव और सत्ता के आधार पर अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार लोकतांत्रिक संस्थाओं को अपने राजनीतिक हितों के अनुसार, प्रभावित करने का प्रयास करती रही है। जब नियम और कानून विपक्षी दलों पर लागू होते हैं तो वही नियम भाजपा समर्थित उम्मीदवारों पर भी समान रूप से लागू होने चाहिए। लोकतंत्र में दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जा सकते।
विजय शंकर नायक ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब पारदर्शिता, निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित हो। इसलिए चुनाव अधिकारियों और निर्वाचन आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि मध्य प्रदेश और झारखंड के मामलों में अलग-अलग दृष्टिकोण क्यों दिखाई दे रहा है।देश की जनता यह जानना चाहती है कि क्या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सभी उम्मीदवारों के लिए एक समान नियम लागू होंगे या फिर राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार मानदंड बदलते रहेंगे। राज्यसभा को कॉरपोरेट घरानों का क्लब बनाने की भाजपा की साज़िश सफल नहीं होने दी जाएगी | झारखंड की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर किस आधार पर ऐसे उम्मीदवारों को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिनका राज्य की जनता के संघर्षों, समस्याओं और जनहित के मुद्दों से कोई प्रत्यक्ष सरोकार नहीं रहा है।
नायक ने कहा कि चुनाव आयोग एवं संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को पूर्ण निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए। यदि नामांकन प्रक्रिया में कोई भी गंभीर कमी या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो बिना किसी दबाव के नामांकन रद्द किया जाना चाहिए, ताकि लोकतंत्र में जनता का विश्वास कायम रहे।
