-“आज O&M, कल पूरा बंदरगाह निजी हाथों में?”…मजदूर संगठनों का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई पोर्ट की ऐतिहासिक इंदिरा डॉक को निजी कंपनियों के हवाले करने की केंद्र सरकार की योजना के खिलाफ बुधवार को मुंबई पोर्ट परिसर में मजदूरों का जबरदस्त आक्रोश फूट पड़ा। मुंबई पोर्ट प्रशासनिक भवन के सामने सभी प्रमुख मजदूर संगठनों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया और निजीकरण के फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की।
मुंबई पोर्ट प्रशासन ने 21 जनवरी 2026 को इंदिरा डॉक को दो हिस्सों में बांटकर 10 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को संचालन एवं रखरखाव (O&M) के आधार पर सौंपने का प्रस्ताव मंजूर किया था। जून 2026 से इस प्रक्रिया को अमल में लाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। मजदूर संगठनों का आरोप है कि यह केवल शुरुआत है और भविष्य में पूरे इंदिरा डॉक के निजीकरण का रास्ता साफ किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि माल ढुलाई और गोदाम संचालन का पूरा काम अब निजी कंपनियां जे. एम. बक्षी और एम. दिनशॉ संभालेंगी। इसके बाद इंदिरा डॉक के किसी भी गोदाम में मुंबई पोर्ट का कर्मचारी कार्यरत नहीं रहेगा। इससे हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
मजदूर नेताओं ने कहा कि मुंबई पोर्ट की आय का प्रमुख स्रोत आयात-निर्यात कारोबार है। इस कारोबार से होने वाली कमाई अब निजी कंपनियों की झोली में जाएगी, जबकि मुंबई पोर्ट को केवल नाममात्र की रॉयल्टी मिलेगी। वर्षों से नई भर्ती पर लगी रोक के कारण कर्मचारियों की कमी पैदा की गई और अब उसी बहाने निजीकरण को आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रदर्शन में वक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाया कि आज “ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस” के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है, कल पूरे बंदरगाह और उसकी बहुमूल्य जमीनों को बिल्डरों के हवाले करने की साजिश रची जा सकती है। उन्होंने कहा कि सड़कें, गोदाम, बिजली, पानी, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का खर्च मुंबई पोर्ट ही उठाएगा, लेकिन लाभ निजी कंपनियां कमाएंगी।
मजदूर नेताओं ने यह भी बताया कि मुंबई पोर्ट ने 30 से 40 करोड़ रुपये खर्च कर जिन गोदामों का निर्माण किया, वे अब निजी कंपनियों के कब्जे में जाने वाले हैं। इतना ही नहीं, इंदिरा डॉक के 18, 19 और 20 नंबर बर्थ के सामने ब्रिटिश काल में बनाए गए बांध को हटाने के लिए लगभग 125 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, लेकिन निजी कंपनियों से इसके बदले कोई आर्थिक योगदान नहीं लिया जाएगा।
मजदूर संगठनों का आरोप है कि इस महत्वपूर्ण निर्णय पर प्रशासन ने प्रमुख यूनियनों से कोई गंभीर चर्चा नहीं की। कर्मचारियों को विश्वास में लिए बिना निर्णय थोपे जा रहे हैं। इससे कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, चिकित्सा सुविधाओं और भविष्य के अधिकारों पर गंभीर संकट पैदा होगा। इतना ही नहीं, मुंबई पोर्ट का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
इस अवसर पर मुंबई पोर्ट ट्रस्ट डॉक एंड जनरल एम्प्लॉईज यूनियन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ मजदूर नेता एड. एस. के. शेट्ये, जनरल सेक्रेटरी सुधाकर अपराज, ट्रांसपोर्ट एंड डॉक वर्कर्स यूनियन के जनरल सेक्रेटरी केरसी पारेख, डॉ. सुरेश माने, मीनेस मेंडोसा तथा बबन शिरोडकर ने कर्मचारियों को संबोधित किया और निजीकरण के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। सभा का संचालन विद्याधर राणे ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन दत्ता खेसे ने किया।
“इंदिरा डॉक बचाओ, मजदूरों के हक बचाओ!”
इसी नारे के साथ मजदूर संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा। यह जानकारी मुंबई पोर्ट ट्रस्ट डॉक अँड जनरल कामगार युनियन पदाधिकारी मारुती विश्वासराव ने दि है
