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सुल्तानपुर में धराया यूपी में कुख्यात मोबाइल टावरों से महंगे उपकरण व डिवाइस उड़ाने वाला गिरोह!

-लाखों की नकदी व चोरी के कीमती माल समेत पांच गिरफ्तार

-अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर आदि जिलों की पुलिस को थी तलाश

-गाज़ियाबाद-मेरठ में बैठे मास्टरमाइंड करते थे गिरोह का संचालन

सामना संवाददाता / सुल्तानपु

मोबाइल टावरों से महंगे उपकरण और कम्युनिकेशन डिवाइस चोरी कर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पुलिस की नींद उड़ाने वाले अंतरजनपदीय गैंग का भंडाफोड़ हो गया है। सुल्तानपुर पुलिस ने गिरोह के पांच शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी के माल की बिक्री से प्राप्त करीब दो लाख रुपये नकद,दो अवैध तमंचे,कारतूस और वारदात में प्रयुक्त दिल्ली नंबर की वैगनआर कार बरामद हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि मेरठ और गाजियाबाद से संचालित यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम देता था। आरोपी पहले लखनऊ में डेरा डालते,फिर सुबह वैगनआर कार का नंबर बदलकर विभिन्न जिलों में मोबाइल टावरों की रेकी करते थे। जहां सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होती या सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होते, वहां देर रात धावा बोलकर लाखों रुपये कीमत के कम्युनिकेशन डिवाइस और टावर पैनल उड़ा ले जाते थे। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि वारदात के बाद आरोपी हाईवे किनारे वाहन खड़ा कर आराम से सो जाते थे ताकि किसी को उन पर शक न हो। चोरी किए गए उपकरणों को कार्टन में पैक कर फ्रैजाइल और लगेज लिखकर दिल्ली भेज दिया जाता था, जहां गिरोह के अन्य सदस्य उन्हें 20 से 40 हजार रुपये प्रति डिवाइस के हिसाब से बेच देते थे।मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने कुंडा भैरोपुर सर्विस लेन के पास घेराबंदी कर सरफराज मलिक, अंकित कुमार, सुहेल मलिक, आमिर मलिक और मोहम्मद अयूब को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने सुल्तानपुर, अमेठी, जौनपुर और प्रतापगढ़ समेत कई जिलों में टावर चोरी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्यों का आपराधिक इतिहास भी रहा है और कुछ आरोपी पूर्व में गाजियाबाद में चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं। आरोपियों की निशानदेही पर कई लंबित मामलों का भी खुलासा हुआ है। सुल्तानपुर के विभिन्न थानों समेत जौनपुर,प्रतापगढ़ और अमेठी में दर्ज कई मुकदमों की गुत्थी इस कार्रवाई से सुलझ गई है। पुलिस अधीक्षक चारु निगम ने बताया कि यह संगठित गिरोह लंबे समय से मोबाइल टावरों को निशाना बना रहा था। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से गैंग का सफल अनावरण किया गया है। उत्कृष्ट कार्य के लिए पुलिस टीम को २५ हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।

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