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संपादकीय : बारह साल का ऑडिट

मोदी जी की उम्र पहले ७५ साल हुई और अब उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर लगातार १२ साल पूरे कर लिए हैं। पंडित नेहरू से भी ज्यादा समय तक वे इस पद पर रहे हैं। यह नया रिकॉर्ड बनाने की वजह से उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। दिल्ली में उन्होंने सबके लिए एक `पार्टी’ का आयोजन किया है। उम्र के ७५ साल होने के रिकॉर्ड की तो खैर गिनती नहीं हो सकी, क्योंकि गुजरात के ही मोरारजी देसाई ८१ साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने थे। नरसिम्हा राव भी काफी उम्र दराज होने पर प्रधानमंत्री बने और उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान दी। मनमोहन सिंह ने भी देश को आर्थिक स्थिरता दी। नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह के इस दौर में मोदी कहीं फिट नहीं बैठते। मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे १२ साल हो गए, लेकिन इससे देश का कोई फायदा हुआ क्या? मोदी के चमचे भी एक चमत्कार ही हैं। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री (मिंधे) बताते हैं कि मोदी ने १२ सालों में एक भी `छुट्टी नहीं ली। जबकि मोदी छुट्टी’ मनाने के लिए अपने आलीशान विमान में बैठकर दुनिया के कई देशों का दौरा करते हैं। हाल ही में वे इटली, नीदरलैंड जैसे देशों में `छुट्टी’ बिताकर लौटे हैं। मोदी तो मानो हमेशा `छुट्टी’ पर ही रहते हैं। वैसे मोदी बड़े दयालु हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत के साथ ८०-८५ जजों को लंदन में छुट्टी मनाने के लिए भेजा और उनकी तीमारदारी में देश के कानून मंत्री को तैनात कर दिया, ताकि जजों की मेहमाननवाजी में कोई कमी न रह जाए। यह एक अनोखा रिकॉर्ड है। पंडित नेहरू ऐसे रिकॉर्ड नहीं बना सके। नेहरू का सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड भले ही मोदी ने तोड़ दिया हो, लेकिन
नेहरू का रिकॉर्ड
साल, महीने और दिन गिनकर नहीं तोड़ा जा सकता। नेहरू ने अपने कार्यकाल में जो किया, राष्ट्र को जो दिया, उसकी तुलना मोदी के इन १२ सालों से नहीं की जा सकती। नेहरू के दौर में यह देश हर किसी को अपना लगता था। भारत माता के दुनियाभर में अनगिनत मित्र थे और पूरी दुनिया में भारत माता का सम्मान था, क्योंकि नेहरू जैसा स्वतंत्रता संग्राम का एक विद्वान सेनानी भारत का नेतृत्व कर रहा था। समाज में जाति और धर्म के नाम पर नफरत का जहर नेहरू ने कभी नहीं घोला। आज तस्वीर बिल्कुल उलट है। मानो देश २०१४ में आजाद हुआ हो और उसके बाद मोदी ही देश के पहले प्रधानमंत्री बने हों। मोदी ने ही देश बनाया है, पूरी दुनिया में इसका ढिंढोरा पीटने के लिए किराए के लोग रखे गए हैं। इन किराए के लोगों को इतिहास की कोई समझ नहीं है। महाराष्ट्र के एक मंत्री पंजाब गए और जिस `ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के लिए इंदिरा गांधी ने अपना बलिदान दे दिया, उसके खिलाफ जहर उगल कर आ गए। देश की रक्षा और अखंडता के लिए अनगिनत लोगों द्वारा दिए गए बलिदान की मोदी और उनके लोगों की नजरों में कोई कीमत नहीं है। लेकिन पुलवामा में ४० जवानों का सामूहिक हत्याकांड और पहलगाम में २६ हिंदुओं का बलिदान मोदी के दौर में राजनीतिक चुनावों के मुद्दे बन गए। `ऑपरेशन ब्लू स्टार’ में भारत के जनरल अरुणकुमार वैद्य समेत सैकड़ों जवानों ने अपनी जान गंवाई थी। इस सर्वोच्च बलिदान को नकारने वाली एक राजनीतिक पीढ़ी मोदी ने इन १२ सालों में तैयार कर दी है। वाजपेयी के दौर में पाकिस्तानी सेना भारतीय सीमा में घुस आई थी। भारत के ५६२ सैनिक इस युद्ध में शहीद हुए थे, तो फिर
कारगिल युद्ध
भी मोदी और उनके लोगों को इतिहास का एक काला अध्याय क्यों नहीं लगता? यह मोदी द्वारा पिछले १२ सालों में बोले गए झूठ की पराकाष्ठा है। इन १२ सालों में नया क्या हुआ, देश और दुनिया में हमारी क्या साख और प्रतिष्ठा बची है, इसका एक निष्पक्ष ऑडिट हो ही जाने दीजिए। ब्रिटिश तो हमारे देश को लूटकर गए थे, लेकिन मोदी के १२ सालों के कार्यकाल में उससे भी बदतर अंदाज में देश को नोचा जा रहा है। नेहरू ने एम्स, आईआईटी, आईआईएम जैसी संस्थाओं की नींव रखी। वहीं मोदी ने ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स और पुलिस को बढ़ावा देकर संवैधानिक संस्थाओं की इमारतों को उखाड़ फेंका। नेहरू १२ सालों में यह सब नहीं कर पाए, वे राष्ट्र कार्य, राष्ट्र निर्माण में लगे रहे। मोदी ने १२ सालों में विनाश, नफरत और बंटवारे की राजनीति को मजबूत किया। उनके दौर में देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह दफन हो गई, रुपया मर चुका है। आयात-निर्यात का संतुलन बिगड़ गया है। विदेशी मुद्रा भंडार खाली होता जा रहा है। देशहित को ताक पर रखकर केवल मुट्ठीभर उद्योगपतियों के फायदे को देखा जा रहा है। बेरोजगार कॉकरोच हो गए है। `नारी शक्ति’ अत्याचार और बलात्कार के कारण रोज चीख-पुकार कर रही है। ८० करोड़ जनता १० किलो मुफ्त अनाज के लिए कतारों में खड़ी है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। चुनाव आयोग और चीफ जस्टिस जैसे लोग भाजपा दफ्तर के चपरासी बनकर रह गए हैं। एक वैभवशाली भारत की यह दुर्दशा पिछले १२ सालों में हुई है और इस दौर की कमान मोदी के हाथों में है। पंडित नेहरू ऐसा `रिकॉर्डतोड़’ काम नहीं कर सके, इसके लिए भारत माता, भारत देश और यहां की जनता पंडित नेहरू की हमेशा शुक्रगुजार रहेगी।

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