मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति राज में पीडब्ल्यूडी बना कमीशनखोरी का अड्डा

महायुति राज में पीडब्ल्यूडी बना कमीशनखोरी का अड्डा

-खाली खजाने से जारी हो रहे करोड़ों के ठेके!

-ठेका देने के बाद मिल रही मंजूरी

सुनील ओसवाल / मुंबई

सरकारी खजाने में पैसा नहीं, बजट में प्रावधान नहीं, वित्त विभाग की मंजूरी नहीं, लेकिन करोड़ों रुपयों के सरकारी निर्माण कार्य धड़ल्ले से किए गए। जलगांव जिले में कृषि भवन निर्माण के नाम पर सामने आए इस चौंकाने वाले मामले ने सार्वजनिक बांधकाम विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्य सरकार ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए जलगांव सार्वजनिक बांधकाम विभाग के अधीक्षक अभियंता प्रशांत सोनवणे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर करोड़ों रुपयों के निर्माण कार्यों की निविदाएं निकाली गर्इं, ठेके दिए गए और निर्माण भी शुरू करवा दिया गया।
न थी वित्तीय मंजूरी और न ही बजटीय प्रावधान!
सरकार का खजाना खाली है, इसके बावजूद टेंडर जारी किए जा रहे हैं। टेंडर जारी होने के बाद प्रस्ताव को मंजूरी दी जा रही है। सरकारी जांच में सामने आया है कि जामनेर, चालीसगांव और पाचोरा में कृषि भवन परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक मंजूरी तो थी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय मंजूरी और बजटीय प्रावधान ही मौजूद नहीं था। इसके बावजूद न सिर्फ टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई बल्कि कार्यारंभ आदेश जारी कर निर्माण कार्यों को जमीन पर उतार दिया गया। हैरानी की बात यह है कि कुछ जगहों पर भवनों का निर्माण पहली मंजिल तक पहुंच चुका है। यानी करोड़ों खर्च होने के बाद अब शासन को नियमों की याद आई है।
पत्र में बड़ा खुलासा
१० अप्रैल २०२६ के गोपनीय सरकारी पत्र में साफ कहा गया है कि संबंधित कार्यों के लिए बजट में आवश्यक निधि उपलब्ध नहीं थी। महाराष्ट्र सार्वजनिक बांधकाम नियमावली के अनुसार, कम से कम ४० प्रतिशत निधि का प्रावधान होने से पहले तकनीकी मंजूरी और निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। इसके बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ाई गर्इं।
करोड़ों के खेल
-जामनेर कृषि भवन : १० करोड़ रुपए से अधिक
-चालीसगांव कृषि भवन : लगभग १२ करोड़ रुपए
-पाचोरा कृषि भवन : १३ करोड़ रुपए से अधिक
कुल मिलाकर ३५ करोड़ रुपए से ज्यादा के काम बिना वित्तीय मंजूरी के शुरू किए गए। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बजट ही नहीं था तो ठेके वैâसे दिए गए? कार्यारंभ आदेश किसके दबाव में जारी हुए और निर्माण कार्यों के पीछे किसका संरक्षण था?
कई लोग हैं शामिल
सरकारी नोटिस फिलहाल अधीक्षक अभियंता सोनवणे कार्य कार्यकारी अभियंता तक सीमित है, लेकिन विभागीय सूत्रों का मानना है कि इतनी बड़ी प्रक्रिया अकेले किसी एक अधिकारी के स्तर पर संभव नहीं। फाइलों की मंजूरी, निविदा प्रक्रिया और निर्माण की प्रगति कई स्तरों से गुजरती है। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ा तो कई और अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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