– साधु-संतों के लाइसेंस आवेदन से मचा बवाल
– पिछले ५ वर्षों में जारी लाइसेंसों की भी जांच की मांग
सुनील ओसवाल / मुंबई
सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच साधु-संतों द्वारा हथियार लाइसेंस के लिए किए गए आवेदनों ने आध्यात्मिक जगत से लेकर गृह विभाग तक हलचल मचा दी है। जिन संतों के हाथों में माला, कमंडल और त्रिशूल दिखाई देते हैं, उनके द्वारा पिस्तौल और रिवॉल्वर के लाइसेंस की मांग ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद न केवल साधु-संतों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि पिछले पांच वर्षों में जारी किए गए हथियार लाइसेंसों की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में आ गई है। सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच साधु-संतों द्वारा हथियार लाइसेंस के लिए किए गए आवेदनों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
स्वतंत्र जांच की मांग
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अब इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है। कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में साधु-संतों के हथियार लाइसेंस आवेदन सामने आने के बाद गृह विभाग के गलियारों में भी इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
६ में से २ को मंजूरी
नासिक जिला प्रशासन को प्राप्त छह आवेदनों में से दो को मंजूरी मिलने के बाद अब केवल साधु-संतों को हथियार लाइसेंस दिए जाने का मुद्दा ही नहीं, बल्कि पिछले पांच वर्षों में नासिक पुलिस आयुक्तालय द्वारा जारी किए गए हथियार लाइसेंसों पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
संबंध ज्यादा महत्वपूर्ण
पिछले कुछ वर्षों में नासिक पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में हथियार लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि लाइसेंस मंजूरी के दौरान सुरक्षा जोखिम, व्यावसायिक आवश्यकता अथवा व्यक्तिगत खतरे जैसे स्थापित मानकों के बजाय संबंध को महत्व दिया गया ऐसा बताया जा रहा है।
सभी लाइसेंसों की हो सकती है जांच!
नासिक में साधु-संतों को गन के लाइसेंस देने का मामला सुर्खियों में है। इस मामले में प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े व्यक्तियों को सुरक्षा के नाम पर हथियार लाइसेंस दिए जा रहे हैं, तो पिछले पांच वर्षों में जारी सभी लाइसेंसों की समीक्षा भी आवश्यक है।
जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, त्र्यंबकेश्वर के लवलेश प्रसाद पांडे तथा आवाहन अखाड़े के अभिनव मिश्र को हथियार लाइसेंस मंजूर किए गए हैं। वहीं स्वामी जयदेवपुरी महाराज तथा श्री सिद्धेश्वरानंद सोमेश्वरानंद के आवेदन आगे की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पास भेजे गए हैं। जबकि महंत स्वामी ओमनंदपुरी और रामनाथ आर्य के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं।
जरूरत क्या है
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के त्र्यंबकेश्वर स्थित कोषाध्यक्ष महंत शंकरानंद सरस्वती ने साधु-संतों को हथियार लाइसेंस दिए जाने पर खुलकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि साधु-महंतों को हथियारों की आवश्यकता ही क्या है? इससे समाज में गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने मांग की कि किसी भी अखाड़े से जुड़े व्यक्ति को हथियार लाइसेंस देने से पहले संबंधित अखाड़े की आधिकारिक अनुशंसा और अखाड़ा परिषद की स्वीकृति अनिवार्य की जाए। आने वाले दिनों में गृह विभाग के लिए यह मामला बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
