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न तो भीख लूंगा, न मैदान छोड़ूंगा!

-बागी गोकुल गीते की महायुति के नेताओं को दो टूक

-नासिक विधान परिषद चुनाव में टेंशन हाई है

सुनील ओसवाल / मुंबई

नासिक स्थानीय स्वराज्य संस्था की विधान परिषद सीट पर महायुति के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द अब विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही खेमे के बागी उम्मीदवार गोकुल गीते बन गए हैं। पिछले कई दिनों से चल रही मनुहार, मध्यस्थों की दौड़भाग और राजनीतिक समझाइश के बीच गीते ने ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे चुनावी समीकरण को हिला दिया है। ‘मेरा गिरीश महाजन से कोई संबंध नहीं है। कोई भी मिलने आ जाए, मैं चुनाव से पीछे हटने वाला नहीं हूं।’ गीते के इस दो टूक एलान ने साफ कर दिया है कि मामला अब केवल एक चुनाव का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का बन चुका है।
सूत्रों के मुताबिक, गीते को मनाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास हुए, लेकिन हर कोशिश नाकाम रही। सबसे सनसनीखेज दावा करते हुए गीते ने कहा कि पिछले आठ दिनों से उन्हें विभिन्न माध्यमों से प्रलोभन दिए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि ‘मुझे भीख नहीं चाहिए, मैं बिकने वालों में से नहीं हूं।’ इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है कि आखिर वे कौन लोग हैं, जो बागी उम्मीदवार को मैदान छोड़ने के लिए राजी करने में जुटे हैं। गीते ने महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराड़े पर भी परोक्ष हमला बोलते हुए कहा कि क्षेत्र के मतदाता ही उन्हें चुनाव लड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं, क्योंकि कई जनप्रतिनिधियों के कामकाज से जनता नाराज है। उन्होंने साफ कहा कि नेताओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन दराड़े को समर्थन देने का सवाल ही पैदा नहीं होता। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गीते का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश उनका ‘महाजन कनेक्शन’ नकारना है। अब तक माना जा रहा था कि पर्दे के पीछे कुछ बड़े नेताओं का आशीर्वाद उन्हें हासिल है, लेकिन गीते ने सार्वजनिक रूप से उससे दूरी बनाकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

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