उमेश गुप्ता / वाराणसी
कहा- स्वच्छता के नाम पर कॉर्पोरेट को फायदा पहुंचाने की नहीं चलेगी साजिश
नगर निगम द्वारा वाराणसी शहरी क्षेत्र से मांस, मछली और मुर्गे की दुकानों को पूरी तरह हटाकर शहर से बाहर भेजने के फैसले के खिलाफ गुरुवार को ‘साझा संस्कृति मंच’ ने मार्च निकालकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
मंच ने चेतावनी दी कि स्वच्छता और सुंदरीकरण की आड़ में गरीबों की रोजी-रोटी छीनने और बनारस के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपते हुए मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि शहर से 5 से 10 किलोमीटर दूर सुदूर इलाकों में दुकानों को स्थानांतरित करना, असल में इस व्यापार को पूरी तरह ठप करने की साजिश है। यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (पसंद के भोजन का अधिकार) का खुला उल्लंघन है। बिना किसी पूर्व परामर्श या संवाद के लिया गया यह फैसला पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।
ये स्वच्छता नहीं, कॉर्पोरेट के लिए ‘मार्केट ड्रिवन तिकड़म’ है
साझा संस्कृति मंच ने नगर निगम की कार्यवाही पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “एक तरफ गरीब खुदरा दुकानदारों को उजाड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बड़े होटलों, मॉल्स और जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को धड़ल्ले से मांस-मछली बेचने की खुली छूट है। यह साफ तौर पर हिंदू-मुस्लिम राजनीति का मोहरा बनाकर गरीब व्यापारियों को तबाह करने और पूरा बाजार कॉर्पोरेट घरानों की झोली में डालने का खेल है।”
जिला मुख्यालय पर मार्च और ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सतीश सिंह, डॉ. धनंजय त्रिपाठी, रामजन्म यादव, डॉ. अनूप श्रमिक, संजीव सिंह, विनय राय मुन्ना, एड. अब्दुल्ला, नीरज, अनंत, डॉ. छेदी लाल निराला, एड. राजेश यादव, एड. प्रेम प्रकाश यादव, मनीष शर्मा, मुनीजा रफीक खान, नीति, सलमा, ओमप्रकाश मिश्रा, ध्रुव, लता, एड. शाहिद जमाल, नेविश और गौतम आदि शामिल रहे।
