मुख्यपृष्ठनए समाचारपंकज चौधरी के छह माह...टीम भी नहीं बना पाये!.. उलझ गये गोरखपुर...

पंकज चौधरी के छह माह…टीम भी नहीं बना पाये!.. उलझ गये गोरखपुर में

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनने का आज छह महीना पूर्ण हो गया। जिस हिसाब से चर्चा है कि विधानसभा चुनाव समय से पहले हो सकता है, तो कुछ जानकर यह कहते पाये गये कि अध्यक्ष जी को उन चेहरों का ऐलान कर देना चाहिए, जिनके बल पर पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव जीतने की तिकड़ी लगाएगी। एक बात पंकज चौधरी को पिछले प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह से अलग बनाती है, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। वह ये कि भूपेंद्र सिंह आम कार्यकर्ताओं तक न पहुंचने की चाह रखते थे और न पहुंच पाये, क्योंकि दूर-दूर से आने वाले कार्यकर्ता उनके बिना मिले इसलिए निराश होकर चले जाते थे कि वह पूर्व से मिलने का समय नहीं निर्धारित करके आ पाये थे। पंकज चौधरी इस मामले में बहुत लोगों से मीलों आगे हैं। कई बार वह बिना कार्यकर्ता के ही उठ कर, बुला कर फोटो खिंचवा कर उसको धन्यवाद देकर विदा करते हैं। कार्यकर्ताओं के चेहरे पर उस पल भर की मुस्कान की अभी तक पंकज चौधरी की उपलब्धि है। फिर न जाने क्यों, बिना दंद-फंद के सबको साथ लेकर चलने वाले अध्यक्ष जी अभी तक अपनी टीम का गठन नहीं कर पाये हैं। यह भी हो सकता कि प्रदेश के सभी जिलों में जाकर संगठन मजबूत करने में समय का पता ही नहीं चल पाया हो। लेकिन आरोप यह भी लगता है कि वह गोरखपुर जिला और गोरखपुर क्षेत्र ठीक करने में इतना उलझ गये कि उन्हें ध्यान ही नहीं आया कि वह पूरे प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष हैं। प्रदेश बड़ा है, जिम्मेदारी बड़ी है, इसलिए बधाई-मिठाई में छह माह चला गया, यह कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है। लेकिन जल्द ही राज्य में विधानसभा चुनाव है इसलिए पार्टी के सुधी जनों की चिंता भी जायज है।
लगभग 25 करोड़ की आबादी वाला प्रदेश, उसमें लगभग पौने तीन करोड़ पार्टी के सदस्य, उसमें भी इनके अध्यक्ष बनने के बाद संगठन के मर्मज्ञ एक गुरुजी की बड़ी मुश्किल से मिलने वाला करोड़ों का आशीर्वाद, माना कि लोड ज्यादा है। फिर भी अध्यक्ष जी से कार्यकर्ताओं को अपेक्षा है कि इनके निर्णय से उनके रूह को जल्दी राहत मिलेगी। नरेंद्र मोदी जी यहीं वाराणसी से सांसद हैं तो काशी क्षेत्र में उनका विस्वास प्राप्त करना। गोरखपुर से यह स्वयं हैं, लेकिन वह भी गोरखपुर से हैं, जिनके नाम का मुख्यमंत्री होने के नाते देश-दुनिया में हिंदू मुख्यमंत्री का डंका बज रहा है। योगी आदित्यनाथ जी। बताते हैं कि टीम गुजरात ने उनको घेरने के लिए गोरखपुर में बहुत इंवेस्ट किया। शिवप्रताप शुक्ल को राज्यसभा भेजा, केंद्रीय मंत्री बनाया। फिलहाल, वह अब तेलंगाना के राज्यपाल हैं। डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल को राज्यसभा भेजा, भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री बना दो महत्वपूर्ण राज्यों कर्नाटक और राजस्थान का प्रभारी बनाया। स्वयं पंकज चौधरी और कमलेश पासवान को केंद्र में राज्यमंत्री बनाया। अब तो खैर प्रदेश अध्यक्ष ही बना दिया। देखना है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष के चयन में क्या निर्णय आएगा, वही गोरखपुर में योगी के सामने प्रदेश अध्यक्ष की प्रभुता तय करेगा।
ऐसा मैं इसलिए कहने की हिम्मत कर रहा हूं कि पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के पहले केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान के निजी स्टेडियम का उद्घाटन था। उसमें पंकज चौधरी मुख्य अतिथि और डॉ. राधामोहन दास विशेष अतिथि थे। उद्घाटन के दिन योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में ही थे, लेकिन वह कार्यक्रम से दूर रहे। कोई बता रहा था कि उनको बुलाया भी नहीं गया था, तो कोई कह रहा था कि योगी आदित्यनाथ गए नहीं। लेकिन जिस समय यह तिकड़ी (पंकज चौधरी-कमलेश पासवान-डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल) उक्त स्टेडियम का उद्घाटन कर रहे थे, उसी समय योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम देने का निर्णय कर लिए। बाद में उसका जोरदार शिलान्यास हुआ। कार्य भी प्रगति पर है। प्रदेश की तो नहीं कह सकता, लेकिन गोरखपुर में विकास का कार्य गति के साथ प्रगति पर है। बात यहीं नहीं समाप्त होती। बताते हैं कि गोरखपुर महानगर अध्यक्ष को योगी जी रिपीट करवाना चाहते थे। कुछ लोग कहते हैं कि अध्यक्ष राजी हो गये थे, लेकिन गुरु मार्गदर्शन से काम करने वाले अध्यक्ष ऐन वक्त पर योगी के ही निकटस्थ किसी और को बना दिया। यह योगी को नागवार लगा। अब क्षेत्रीय अध्यक्ष को लेकर भी लड़ाई नाक पर बन आयी है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री एक कार्यक्रम में शामिल होने गोरखपुर गये थे तो उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा था कि महराजगंज के लोगों का मंदिर से पुराना नाता है। यहां की हर छोटी-बड़ी समस्या के लिए हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा के लोगों ने मिल कर संघर्ष किया है। बता दें कि हिंदू युवा वाहिनी पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापतिराम त्रिपाठी को, जिसे पंकज चौधरी अपने लोकसभा क्षेत्र में सुरक्षित स्थान बता कर विधानसभा का चुनाव लड़ाने ले गये थे, को हराने का भी आरोप लगा है। महराजगंज में योगी की दहाड़ संगठन में उनकी राय को दरकिनार करने से जोड़ कर देखा जा रहा है। यह ध्यान रखने की बात है कि टीम गुजरात ने योगी को घेरने के लिए जितने भी गण पैदा किए, सब अपनी-अपनी प्रोफाइल मेंटेन करने में जुट गये, कोई योगी को टस से मस नहीं कर पाया।

अन्य समाचार