ईश्वरी राज
`सुनो जमूरे…’
`हां उस्ताद!’
`बता देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में क्या चल रहा है?’
यहां तो रोज नया ड्रामा है!
`उस्ताद, यूपी में बुलडोजर बाबा की हवा टाइट है, लेकिन अंदरखाने सुनो, २०२७ के लिए टिकट की लड़ाई में विधायक जी लोग अभी से लखनऊ-सड़क नाप रहे हैं। पीडीए वाले अखिलेश भैया भी जाति का गणित लेकर घूम रहे हैं। मायावती बुआ शांत हैं, पर हाथी कब चिंघाड़ मार दे पता नहीं। अफसरों में भी चर्चा है कि ‘दिल्ली का फोन’ किसको आएगा। उस्ताद, यहां हवा बनाने वाले बहुत, पर हवा किस तरफ बहेगी वो तो वोटर जाने!
`अब पहाड़ की बता…’
पहाड़ पर भी गर्मी है!
`उस्ताद, धामी जी की कुर्सी पक्की लग रही, पर पहाड़ पर सड़क जितनी घुमावदार सियासत है। हर साल एक-दो विधायक नाराज होकर दिल्ली भागते हैं। कांग्रेस वाले हरीश रावत दादा भी ‘हम अभी बूढ़े नहीं हुए’ बोलकर टहल रहे हैं। अंकिता भंडारी केस के बाद से महिला वोटर पर सबकी नजर है। उस्ताद, यहां विकास के नाम पर बोर्ड तो लगते हैं, पर जमीन पर काम कितना उतरा वो जनता पूछ रही।’
`जमूरे, पलटू चचा के राज बिहार का क्या हाल है?’
ये तो पलटी का गढ़ है!
`उस्ताद, नीतीश चचा मजे के साथ हैं पर कब किस करवट बैठें, कोई नहीं जानता। सम्राट चौधरी सीएम हैं, पर बॉस कौन वाली खुसर-पुसर चालू है। तेजस्वी भैया रोज एक नया वादा फेंक रहे हैं। जातिगत जनगणना के बाद तो हर नेता पिछड़े का चाचा बन गया है। उस्ताद, बिहार में गठबंधन मतलब ‘जब तक फायदा तब तक भाई-भाई’।
`महारानी का राजस्थान वैâसा चल रहा है?’
यहां तो राजा बदलने की परंपरा
`उस्ताद, भजनलाल जी सीएम हैं पर वसुंधरा मैडम की परछाई अभी भी जयपुर में घूमती है। गहलोत जी हार के बाद भी ‘जादूगर’ वाला टैग नहीं छोड़ रहे। पायलट साहब दिल्ली-पंजाब में दिख रहे, पर नजर राजस्थान पर। पेपर लीक पर युवा अभी भी खफा है। जमूरे, यहां ५ साल बाद जनता ‘राजा बदल दो’ वाला बटन दबा देती है।’
`जमूरे देश का दिल वैâसे धड़क रहा है? बता एमपी की खबर!
हमारा टाइम आएगा!
`उस्ताद, मोहन यादव जी सीएम हैं, पर ‘मामा शिवराज’ अभी भी लाड़ली बहनों के दिल में हैं। लाड़ली बहना स्कीम ने तो बीजेपी की नैया पार लगा दी थी। कांग्रेस में कमलनाथ जी और दिग्गी राजा अब भी ‘हमारा टाइम आएगा’ बोलते हैं।’
`तो जमूरे, कुल मिलाकर?’
उस्ताद, पांचों जगह बीजेपी की गाड़ी चल रही है, पर स्टेयरिंग पर किसका हाथ रहेगा, इसकी रेस लगी है। जनता सब देख रही है…अगला पलटी कब होगा, कोई नहीं जानता! क्योंकि बढ़ती महंगाई से वह बहुत परेशान है…।’
