सुनील ओसवाल / मुंबई
-मकोका की चेतावनी के बाद भी
-मुंबई में नहीं थम रहा काला कारोबार
-लोगों का कहना है कि क्या कार्रवाई सिर्फ छोटे विक्रेताओं तक सीमित है और बड़े सप्लाई नेटवर्क अब भी कानून के शिकंजे से बाहर हैं?
महाराष्ट्र में गुटखा और सुगंधित तंबाकू पर प्रतिबंध को लेकर सरकार भले ही सख्त रुख अपनाने का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। एक ओर एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने गुटखा तस्करी और बिक्री से जुड़े नेटवर्क पर ‘मकोका’ लगाने जैसी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है, इसके बावजूद मुंबई और उपनगरों में प्रतिबंधित गुटखा आज भी खुलेआम बिकता दिखाई दे रहा है।
राज्य सरकार की गुटखा बंदी नीति और वास्तविक स्थिति के बीच का यह विरोधाभास अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रतिबंध लागू है, तो आखिर मुंबई की दुकानों तक गुटखा पहुंच वैâसे रहा है? सूत्रों और स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, मुंबई में पहुंचने वाले प्रतिबंधित गुटखे की आपूर्ति कथित तौर पर नासिक और पालघर मार्ग से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई और समय-समय पर पकड़ी जाने वाली खेपों ने इस चर्चा को और बल दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गुटखा बिक्री की पूरी शृंखला पर मकोका लगाने की तैयारी है तो फिर महानगर की पान दुकानों, छोटी किराना दुकानों और गुप्त नेटवर्क के जरिए यह कारोबार अब भी वैâसे फल-फूल रहा है?
निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से गुटखे को वैंâसर समेत कई गंभीर बीमारियों का कारण बताते रहे हैं। इसके बावजूद प्रतिबंधित उत्पादों की उपलब्धता यह संकेत देती है कि तस्करी और अवैध वितरण तंत्र पर अब तक पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है। विपक्षी दल और सामाजिक कार्यकर्ता भी समय-समय पर यह सवाल उठाते रहे हैं कि करोड़ों रुपए के इस अवैध कारोबार के पीछे मौजूद नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
