-तकनीक का इस्तेमाल दुनिया की बेहतरी के लिए हो, विनाश के लिए नहीं
तकनीकी जगत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को हाल ही में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में एक असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। जब वे मंच पर भाषण देने पहुंचे, तो लगभग २०० छात्रों ने उनके विरोध में वहां से वॉकआउट कर दिया। सवाल यह उठता है कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक के छात्र, दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी के मुखिया का विरोध क्यों कर रहे हैं और इस विरोध का असली अर्थ क्या है?
तकनीक और मानवीय मूल्यों का टकराव
दिलचस्प बात यह है कि पिचाई ने छात्रों के गुस्से से बचने के लिए अपने भाषण में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ शब्द का जिक्र तक नहीं किया और अपना ध्यान अपने व्यक्तिगत संघर्षों पर रखा। लेकिन छात्र सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि कंपनी की नीतियों से नाराज थे।
हाल ही में गूगल के पूर्व सीईओ एरिक श्मिट को भी एरिजोना यूनिवर्सिटी में एआई पर बात करने के लिए हूटिंग का सामना करना पड़ा था। यह दर्शाता है कि आज की युवा पीढ़ी (विशेषकर सिलिकॉन वैली के केंद्र में पढ़ रहे छात्र) एआई और आधुनिक तकनीक को बिना किसी नैतिक नियंत्रण के स्वीकार करने को तैयार नहीं है। वे तकनीक के अंधाधुंध विकास और युद्धों में इसके इस्तेमाल को लेकर बेहद चिंतित हैं।
इस विरोध का असली अर्थ क्या है?
फ्रीडम ऑफ स्पीच और एक्टिविज्म: स्टैनफोर्ड के छात्रों का यह कदम दिखाता है कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों के वैंâपस अब केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे वैश्विक राजनीति और मानवाधिकारों के बड़े मंच बन चुके हैं।
अकादमिक संस्थान बनाम कॉर्पोरेट फंडिंग: छात्र यूनिवर्सिटी प्रशासन की उस सख्ती का भी विरोध कर रहे हैं, जो वैंâपस में फिलिस्तीन-समर्थक प्रदर्शनों को दबाने के लिए की गई। ‘पीपल्स कमेंसमेंट’ नाम से अलग कार्यक्रम चलाना यह दिखाता है कि छात्र पारंपरिक व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।
लीडरशिप के लिए चेतावनी: यह घटना सुंदर पिचाई और उनके जैसे अन्य टेक दिग्गजों के लिए एक सीधा संदेश है कि आने वाली पीढ़ी के टैलेंट को आकर्षित करने के लिए कंपनियों को अपनी ‘नैतिक छवि’ को सुधारना होगा।
स्टैनफोर्ड में हुआ यह वॉकआउट सिर्फ एक भाषण का बहिष्कार नहीं था, बल्कि यह कॉर्पोरेट जवाबदेही, तकनीक के नैतिक उपयोग और मानवाधिकारों के पक्ष में युवाओं की एक मुखर आवाज थी। यह साफ करता है कि भविष्य के ये निर्माता (ग्रेजुएट्स) केवल बड़ी नौकरियों या तकनीकी क्रांतियों से संतुष्ट नहीं होंगे, वे यह भी देखेंगे कि उस तकनीक का इस्तेमाल दुनिया को बेहतर बनाने के लिए हो रहा है या विनाश के लिए।
विरोध की जड़: ‘प्रोजेक्ट निंबस’ और नैतिक जिम्मेदारी
छात्रों की इस नाराजगी का सबसे बड़ा कारण गूगल का इजरायली सरकार और उसकी सेना के साथ हुआ ‘प्रोजेक्ट निंबस’ समझौता है। यह १.२ अरब डॉलर का एक क्लाउड-कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रोजेक्ट है। प्रदर्शनकारी छात्रों का मानना है कि गूगल की इस तकनीक का इस्तेमाल गाजा में चल रहे युद्ध और फिलिस्तीनियों की निगरानी के लिए किया जा सकता है। सुंदर पिचाई का विरोध करके छात्र यह संदेश दे रहे हैं कि कॉर्पोरेट कंपनियों को केवल मुनाफे पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपनी तकनीक के सामाजिक और मानवीय परिणामों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।
