मुख्यपृष्ठस्तंभभोजपुरिया व्यंग्य: सोशल मीडिया पर रायता फइलावे के महामारी!

भोजपुरिया व्यंग्य: सोशल मीडिया पर रायता फइलावे के महामारी!

प्रभुनाथ शुक्ल / भदोही

हमारे समाज में आजकाल एगो नया बीमारी गांव से लेके शहर, चौपाल से लेके मोबाइल तक तेजी से फइल गइल बा रायता फइलावे के महामारी। पहिले लोग खांसी-जुकाम से परेशान रहत रहल, अब लोग बिना बात के रायता फइलावे में मास्टरी हासिल कर लिहले बा। हालत ई बा कि जेकरा लगे जेतना कम जानकारी बा, ऊ ओतने तेजी से रायता फइलावत बा।
पहिले रायता थारी में सजत रहे। दही, जीरा, धनिया आ नमक के संग ओकर इज्जत रहत रहे। अब बेचारा रायता मुहावरा बन के बदनाम हो गइल बा। जवन काम लोग खुद बिगाड़ेला, ओकर दोष रायता पर डाल देला। अरे भाई! रायता का बिगाड़लस? ऊ त चुपचाप कटोरी में पड़ल रहे, तू खुदे फइलवले बाड़ऽ।
सोशल मीडिया त रायता फइलावे के सबसे बड़ा कारखाना बन गइल बा। सबेरे आंख खुलते कुछ लोग ब्रश बाद में करेला, रायता पहिले फइलावेला। केहू बिना पढ़ले खबर भेज देला, केहू बिना समझले टिप्पणी ठोक देला। पांच मिनट में एगो अफवाह हजारों मोबाइल में घूमे लागेला। बाद में पता चलेला कि खबर त उतने सांच रहे, जतना सावन में बरफबारी।
राजनीति में त रायता फइलावे के प्रतियोगिता चल रहल बा। सत्ता वाला कहेला विपक्ष रायता फइलावत बा, विपक्ष वाला कहेला सरकार रायता फइलावत बा। जनता बेचारी सोचत रह जाला कि आखिर सही रायता कवन बा? एही चक्कर में असली मुद्दा कटोरी में सूख जात बा आ रायता चारो ओर पसरा रहेला।
कुछ लोग त एतना माहिर हो गइल बा कि जहां शांति देखेला, ओहिजा रायता लेके पहुंच जात बा। अगर दू आदमी प्रेम से बतिया रहल होखे, त ऊ तीसरा आदमी बन के पहुंच जाई आ कह दी – ‘तहरा बारे में ऊ कुछ अउरी कहत रहे।’ बस, एतना सुनते रायता फइल गइल।
आज जरूरत एह बात के बा कि रायता फइलावे से पहिले दिमाग के चम्मच जरूर चला लिहल जाव। हर सुने-सुनावल बात के आगे बढ़ावे से बांचल जाव। ना त ई महामारी एतना बढ़ी कि एक दिन लोग सांच खोजत रह जाई आ रायता ही रायता नजर आई।
त आखिर में बस एतने कहब, रायता खाईं, स्वाद बढ़ाईं, बाकि रायता फइलावे के बीमारी से दूर रहीं। काहे कि फइलावल रायता आखिर में घूम-फिर के अपने कपड़ा परे गिरेला।
!!समाप्त!!

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