शीतल अवस्थी
हिंदू धर्म परंपराओं में लक्ष्मी पूजा रोग, दरिद्रता को दूर कर सुख, ऐश्वर्य और धन की कामना को पूरा करने वाली मानी गई है। इसके लिए देवी उपासना, लक्ष्मी उपासना धन, वैभव के साथ भरपूर शांति की चाहत को जल्द पूरा करने वाली बताई गई है।
धर्म व ज्योतिष शास्त्रों में बताए राशिनुसार चंद आसान और धनकुबेर बनाने वाले विशेष लक्ष्मी मंत्रों का स्मरण व पूजा उपाय जरूर अपनाएं। शास्त्रों में शाम व रात के वक्त लक्ष्मी पूजा विशेष फलदायी मानी गई है। इस शुभ घड़ी में माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। अगर आप किसी विवशता या हालात के चलते ऐसा न कर पाएं तो पंचोपचार पूजा यानी लाल चंदन, अक्षत, गुलाब या कमल के फूल, धूप, दीप व नैवेद्य से भी लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं, लेकिन इस पूजा में अपनी राशि के मुताबिक, कुछ विशेष लक्ष्मी मंत्रों का स्मरण जरूर करें। नवरात्रि में इन मंत्रों का पूरी पवित्रता और आस्था के साथ लाल आसन पर बैठकर किसी देवी या महालक्ष्मी मंदिर में यथाशक्ति कमलगट्टे की माला से कम से कम १०८ बार जप करना भी भरपूर आमदनी व बचत की चाहत को पूरी कर शांत और सुखी जीवन देने वाला माना गया है।
मेष, वृश्चिक – ॐ ऐं क्लीं सौं:
वृषभ, कर्क – ॐ ऐं क्लीं श्रीं
मिथुन – ॐ क्लीं ऐं सौं:
सिंह – ॐ ह्रीं श्रीं सौं:
कन्या – ॐ श्रीं ऐं सौं:
तुला – ॐ ह्रीं क्लीं श्री
धनु व मीन – ॐ ह्रीं क्लीं सौं:
मकर – ॐ ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं सौं:
कुंभ – ॐ ह्रीं ऐं क्लीं श्रीं
