मराठवाड़ा, ठाणे और कल्याण-डोंबिवली जैसे इलाकों में महावितरण द्वारा लगाए जा रहे ‘स्मार्ट मीटर’ का जनता खुलकर विरोध कर रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि नागरिकों ने सोसायटियों के मीटर बॉक्स पर ताले लगा दिए हैं। लोगों के इस डर और गुस्से के पीछे केवल अफवाहें नहीं हैं, बल्कि कुछ महत्वपूर्ण तथ्यपरक और तकनीकी कारण भी हैं।
नागरिकों के विरोध और डर की मुख्य वजहों पर एक नजर-
बिना विकल्प के अनिवार्य करने की कोशिश: सरकार और बिजली नियामक आयोग (एम ईआरसी)ने शुरुआत में कहा था कि पुराने मीटरों को बदलना पूरी तरह ऐच्छिक (वैकल्पिक) होगा। इसके बावजूद, महावितरण के कर्मचारी पुलिस सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर सोसायटियों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का प्रयास कर रहे हैं। जब नागरिक इस संबंध में आधिकारिक सरकारी आदेश (जीआर) की मांग करते हैं तो प्रशासन के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं होता।
बिलिंग में पारदर्शिता की कमी और तकनीकी गड़बड़ियां: उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा डर ‘फास्ट मीटरिंग’ (मीटर का तेज भागना) को लेकर है। जिन जगहों पर ये मीटर प्रायोगिक तौर पर लगे हैं, वहां लोगों के बिल अचानक दो से तीन गुना तक बढ़ गए। इसके पीछे केवल बिजली की खपत नहीं, बल्कि स्मार्ट मीटर में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर और पल्स रीडिंग की तकनीकी खामियों को जिम्मेदार माना जा रहा है।
स्मार्ट चिप का अतिरिक्त खर्च: लोगों में यह तकनीकी समझ भी बढ़ रही है कि इन स्मार्ट मीटरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए एक ‘स्मार्ट चिप’ (सिम कार्ड की तरह) लगी होती है। उपभोक्ताओं को डर है कि इस चिप के रखरखाव और डेटा ट्रांसफर का मासिक खर्च अंतत: उनके ही बिजली बिल में ‘अतिरिक्त शुल्क’ के रूप में जोड़ दिया जाएगा।
प्रीपेड सिस्टम का दबाव: इन मीटरों को पूरी तरह ‘प्रीपेड मोड’ पर चलाने की योजना है। मध्यम और निचले वर्ग के परिवारों को डर है कि यदि किसी महीने आर्थिक तंगी के कारण वे समय पर रिचार्ज नहीं कर पाए, तो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या पूर्व सूचना के, कंप्यूटर सिस्टम से उनकी बिजली तुरंत काट दी जाएगी। यह पूरा विवाद तकनीक के खिलाफ नहीं, बल्कि उसे लागू करने के तरीके के खिलाफ है। नागरिकों का मानना है कि जब तक महावितरण इस नई प्रणाली की सटीकता, चिप के खर्च और बिलिंग सॉफ्टवेयर को लेकर १०० प्रतिशत पारदर्शिता नहीं बरतता, तब तक उनके मीटरों पर यह ताला लगा रहेगा। जनता अपनी जेब पर पड़ने वाले इस अनचाहे बोझ से खुद को सुरक्षित रखना चाहती है।
