अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘टोल-प्रâी’ घोषित कर अपनी कूटनीतिक जीत का ढोल पीट दिया हो, लेकिन ईरान ने उनके दावे की हवा निकाल दी है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर सीधे टोल नहीं लगाया जाएगा, मगर सुरक्षा और अन्य समुद्री सुविधाओं के नाम पर शुल्क जरूर वसूला जा सकता है।
ईरान के इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल और गैस गुजरती है। ऐसे में किसी भी अतिरिक्त शुल्क का बोझ आखिरकार तेल की कीमतों और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि अमेरिका-ईरान समझौते के बाद होर्मुज पूरी तरह खुल गया है और भविष्य में भी यह ‘टोल-प्रâी’ रहेगा। उन्होंने इसे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी सफलता बताया था। लेकिन ईरान ने जवाबी संकेत देते हुए स्पष्ट कर दिया कि समुद्री सेवाएं मुफ्त में उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी। तेहरान ने भले ही ‘टोल’ शब्द से दूरी बनाई हो, लेकिन ‘सेवा शुल्क’ की बात कहकर यह जता दिया है कि होर्मुज पर उसका प्रभाव और नियंत्रण बरकरार है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान इन शुल्कों को किस रूप में लागू करता है और उसका वैश्विक व्यापार पर कितना असर पड़ता है।
तेल बाजार में बढ़ी बेचैनी
फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन माना जाता है। यहां पैदा होने वाला कोई भी विवाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भूचाल ला सकता है। ऐसे में ट्रंप के ‘टोल-प्रâी’ दावे और ईरान के ‘फीस जरूर लगेगी’ वाले रुख ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बहस के केंद्र में ला दिया है।
