-विदेशी जहाजों को मुंबई से बेचा जा रहा सब्सिडी वाला तेल
-फिशिंग कोटे के २०० टन डीजल के साथ पकड़े गए स्मगलर
फिरोज खान / मुंबई
अक्सर विदेशी जहाजों से डीजल की स्मगलिंग करके मुंबई लाकर बेचे जाने की खबरें आती रहती हैं। लेकिन अब समंदर में जो खतरनाक खेल खेला जा रहा है, उसने सभी को हैरानी में डाल दिया है। तस्कर ‘वेरी लो सल्फर फ्यूल ऑयल’ (एक तरह का डीजल) की स्मगलिंग कर विदेशी जहाजों को सप्लाई कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, समंदर में बड़े पैमाने पर इसकी स्मगलिंग की जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, समंदर में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो डी कंपनी से भी ज्यादा खतरनाक है। यह गिरोह एक तरीके से आर्थिक आतंकवाद को अंजाम दे रहा है। यह गिरोह सब्सिडी वाला तेल मछुआरों के नाम पर उठाता है और दुबई के नाम पर फर्जी बिल बनाकर रूसी जहाजों को महंगे दामों में बेचते हैं। सूत्र बताते हैं कि एक समय था दाऊद इब्राहिम विदेशी सोना, चांदी और ड्रग्स को स्मगलिंग करके भारत में लाता था, लेकिन अब समुद्र में ‘रिवर्स स्मगलिंग’ की जा रही है। टैक्स और डोमेस्टिक ड्यूटी की चोरी कर गिरोह देश का अरबों रुपए का तेल विदेशी जहाजों को चोरी-छिपे बेच रहे हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब सोमवार को कस्टम्स प्रिवेंटिव विंग ने मुंबई तट के पास एक फ्यूल स्मगलिंग और ट्रांसफर नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। उन्होंने एक रूसी झंडे वाले जहाज और एक भारतीय बंकर बार्ज को रोका, जिस पर आरोप है कि वह विदेशी जहाज को वह तेल सप्लाई कर रहा था। करीब २०० टन ‘वेरी लो सल्फर फ्यूल ऑयल’ नकली एक्सपोर्ट डॉक्यूमेंट्स के जरिए गैर-कानूनी तरीके से रूसी झंडे वाले जहाज एमटी अंगारा को सप्लाई किया जा रहा था। कोस्ट गार्ड के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे संगठित गिरोह हैं, जो संघर्ष वाले इलाकों से डीजल खरीदते हैं और गहरे समंदर में मर्चेंट जहाजों को बेचते हैं, जिससे भारत को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान होता है।
फेक बिल से दिया चकमा
जांच करने वालों ने पाया कि इंडियन ऑयल के नकली एक्सपोर्ट बिल का इस्तेमाल करके और एक्सपोर्ट शिपिंग बिल फाइल करने जैसे जरूरी कस्टम प्रोसेस को चकमा देकर फ्यूल सप्लाई का काम किया गया था। अधिकारियों का आरोप है कि ये तरीके लागू टैक्स और डोमेस्टिक ड्यूटी से बचने के लिए अपनाए गए थे।
कैसे मिला सब्सिडी वाला फ्यूल?
अहम बात यह है कि इस डीजल का सीधा उपयोग मछुआरों की बोट समुद्री जहाजों और उद्योगों में बॉयलर और भट्टियों को चलाने के लिए किया जाता है। सवाल यह है कि सरकारी सब्सिडी वाला फ्यूल स्मगलरों के हाथ कैसे लग रहा है? सूत्र बताते हैं कि यह तो संयोग है कि इंडियन कोस्टल गार्ड को भनक लगी और करीब २०० टन ऐसे डीजल की तस्करी करते पकड़ा गया।
