उमेश गुप्ता / वाराणसी
बुधवार को ट्रांसजेंडर सेल, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में “पहचानों के साथी” पहल के अंतर्गत मीडिया पेशेवरों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य पत्रकारों, संपादकों, कंटेंट क्रिएटर्स एवं अन्य मीडियाकर्मियों का एक सहयोगी नेटवर्क तैयार करना है, जो LGBTQIA+ समुदायों से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील, सम्मानजनक और समावेशी रिपोर्टिंग को बढ़ावा दे सके।
प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के नीति ने बताया कि मीडिया समाज में जनमत निर्माण और सामाजिक दृष्टिकोणों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। LGBTQIA+ समुदायों के जीवन-अनुभवों, चुनौतियों और उपलब्धियों को सही संदर्भ और सम्मान के साथ प्रस्तुत करना समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसी उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को LGBTQIA+ समुदाय की विविध पहचानों, जेंडर और लैंगिकता की बुनियादी समझ, समावेशी भाषा के प्रयोग, नैतिक रिपोर्टिंग और समुदायों के प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों पर जानकारी प्रदान की गई। सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों के लिए ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे वे समझ सकें कि समाचारों, तस्वीरों और सार्वजनिक विमर्श में LGBTQIA+ समुदायों का प्रतिनिधित्व किस प्रकार अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है।
प्रोफेसर संजय, समन्वयक, ट्रांसजेंडर सेल ने उद्घाटन सत्र में बताया कि महामहिम राज्यपाल उत्तर प्रदेश श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं माननीय कुलपति आनंद कुमार त्यागी के निर्देशन में जुलाई 2023 से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में ट्रांसजेंडर, क्वीयर एवं अन्य यौनिक पहचान रखने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करने, उन्हें गरिमायुक्त करियर चुनने के लिए प्रोत्साहित करने तथा उनके खिलाफ होने वाली हिंसा और भेदभाव को समाप्त कर एक समावेशी माहौल तैयार करने के उद्देश्य से ट्रांसजेंडर सेल की स्थापना की गई है। यह सेल विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर एवं वाराणसी जिले में ट्रांसजेंडर लोगों के प्रति जागरूकता अभियान लगातार चला रहा है।
प्रो. अनुराग कुमार ने कहा कि हम ट्रांसजेंडर जीवन की चुनौतियों से जितना परिचित होंगे, उतना ही उनके प्रति हमारी सामाजिक सोच समृद्ध होगी। उनकी चुनौतियां घर से शुरू होकर समाज तक विस्तार पाती हैं। इस दुरूह जीवन में अस्मिता की तलाश और करियर का निर्माण निरंतर जटिल से जटिलतम प्रक्रिया का स्वरूप धारण कर लेता है। इस समूह के प्रति बनी-बनाई धारणाओं को तोड़े बिना संवाद का उचित प्रतिफल प्राप्त नहीं हो सकता। ट्रांसजेंडर अस्मिता की स्वीकृति ही इस समूह के प्रति समावेशी सफलता है।
प्रिज्मैटिक फाउंडेशन से टैन ने कार्यक्रम में “LGBTQIA+ से परिचय”, “शब्दावली बाज़ार”, “हेडलाइन: पास या फेल” तथा “नज़र और नज़रिया” जैसी गतिविधियां कराईं। प्रिज्मैटिक फाउंडेशन का मानना है कि मीडिया और समुदायों के बीच संवाद एवं सहयोग सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम है। “पहचानों के साथी” पहल के माध्यम से ऐसे मीडिया सहयोगियों का नेटवर्क विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो विविध पहचानों और अनुभवों को सम्मानपूर्वक सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हों।
कार्यक्रम का संचालन रूमान ने किया तथा स्वागत अनामिका ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अनामिका, आदित्य और अर्जुन उपस्थित रहे।
