करोड़ों खर्च के दावों के बावजूद टपकीं स्टेशन की छतें, भीगते रहे यात्री
जेदवी / मुंबई
मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में लगातार तीसरे दिन भी हुई बारिश का असर गुरुवार को भी जनजीवन पर साफ दिखाई दिया। मानसून की पहली तेज बारिश ने पश्चिम रेलवे की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने और बेहतर इंतजामों के दावों के बावजूद कई रेलवे स्टेशनों की छतों से पानी टपकने लगा। इससे यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर भीगते हुए ट्रेन का इंतजार करना पड़ा।
रेलवे ने दावा किया था कि इस बार मानसून से निपटने के लिए १२६ हाई-वैâपेसिटी डीवाटरिंग पंप लगाए गए हैं। करीब ६० किलोमीटर नालों की सफाई, ५८ कल्वर्ट की गाद निकालने, पटरियों की ऊंचाई बढ़ाने, ड्रोन से निगरानी और स्टेशन की छतों की मरम्मत जैसे कई काम किए गए हैं। लेकिन पहली ही बारिश में इन दावों की हकीकत सामने आ गई।
सीढ़ियों पर भी रिसाव
बोरीवली, मालाड, कांदिवली, दादर और प्रभादेवी जैसे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म की छतों से लगातार पानी टपकता रहा। कई जगह प्लेटफॉर्म की बेंचों के ऊपर भी पानी गिरता रहा, जिससे यात्री बैठ भी नहीं सके। प्रभादेवी स्टेशन की सीढ़ियों पर भी रिसाव देखा गया।
दावे हुए फेल
यात्रियों ने सोशल मीडिया और रेल मदद पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कर रेलवे की तैयारियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अगर प्लेटफॉर्म की छतें ही सुरक्षित नहीं हैं, तो यात्रियों की सुविधा के दावे वैâसे सही माने जाएं?
