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प्रयागराज में दर्दनाक हादसा : बारिश के बीच खेत में उतरा करंट…तड़पकर युवक और किशोर की मौत…गांव में कोहराम

राजेश सरकार / प्रयागराज

जनपद के बहरिया थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां बारिश के दौरान खेत में करंट उतरने से एक युवक और एक किशोर की मौके पर ही मौत हो गई। बुधवार शाम करीब पांच बजे हुई इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और भारी हंगामा खड़ा हो गया।
खेत में फैला था करंट…तड़पकर तोड़ा दम
जानकारी के अनुसार, बहरिया थाना क्षेत्र के खालसा गांव में बुधवार शाम को तेज बारिश हो रही थी। इसीबीच खेत में अचानक बिजली का करंट उतर आया। खेत के पास मौजूद एक युवक और एक किशोर इस जानलेवा करंट की चपेट में आ गए। करंट का झटका इतना जोरदार था कि दोनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और खेत में ही तड़प-तड़पकर दोनों ने दम तोड़ दिया।
मृतकों की हुई पहचान
हादसे का शिकार हुए दोनों मृतकों की पहचान स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों द्वारा कर ली गई है। इनमें अर्पित (14) पुत्र सुरेंद्र कुमार निवासी खालसा गांव तथा कमलेश कुमार (29) पुत्र सीताराम निवासी खालसा गांव के रूप में हुई है।
मौके पर जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा
शाम पांच बजे जैसे ही इस दर्दनाक हादसे की खबर ग्रामीणों को मिली। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। दो मौतों से गुस्साए और दुखी ग्रामीणों ने घटना को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और आक्रोशित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया। इस हृदयविदारक घटना के बाद से मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे खालसा गांव में इस समय मातम पसरा हुआ है।
तत्काल बिजली आपूर्ति ठप
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस ने स्थानीय उपकेंद्र से संपर्क कर संबंधित लाइन की बिजली सप्लाई को तुरंत कटवाया।
– शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
पुलिस ने आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराने के बाद दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लिया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
हादसे के कारणों की जांच
बिजली विभाग के स्थानीय इंजीनियरों की टीम को मौके पर भेजा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि करंट किस तकनीकी खराबी या ढीले तार की वजह से खेत में उतरा था।
– कैसे मिलेगा मुआवजा
बिजली विभाग (यूपीपीसीएल) की लापरवाही जैसे जर्जर तार का टूटना आदि साबित होने पर विभाग द्वारा मृतक के परिजनों को निर्धारित सरकारी मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
राजस्व विभाग की रिपोर्ट जरूरी
स्थानीय लेखपाल और तहसीलदार मौके की रिपोर्ट तैयार कर जिला मजिस्ट्रेट को सौंपते हैं, जिसके आधार पर ‘दैवीय आपदा कोष’ या अन्य राहत कोष से मदद राशि स्वीकृत की जाती है।

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