मुख्यपृष्ठनए समाचारशहर की कहानी, मुंबईकरों की जुबानी : मुंबई मनपा का मानसून सरेंडर!

शहर की कहानी, मुंबईकरों की जुबानी : मुंबई मनपा का मानसून सरेंडर!

द्रुप्ति झा

-मनपा आयुक्त अश्विनी भिड़े का बड़ा कबूलनामा

-कागजों पर थी मानसून की तैयारी, शहर हुआ पानी-पानी

मुंबई में मानसून की पहली बारिश ने ही जब मनपा के दावों की हवा निकाल दी, तो अब खुद मनपा कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने अपनी नाकामी स्वीकार करते हुए मनपा प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कमिश्नर भिड़े ने बेहद आक्रामक और कड़े रुख में स्वीकार किया है कि जमीनी स्तर पर मानसून की तैयारियों में भारी कमी रह गई है। कमिश्नर के इस बयान के बाद अब मनपा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, यानी इतने हादसों के बाद आगे अब और भी हादसे होने है क्योंकि मनपा नाकाम है और इसका खामियाजा मुंबईकरों को भुगतना पड़ेगा।
अधिकारियों ने वातानुकूलित कमरे में बैठकर केवल नीतियां बनाई
अश्विनी भिड़े ने मनपा की लापरवाही को उजागर करते हुए साफ शब्दों में कहा कि हमारी योजना बहुत अच्छी थी, कागजों पर सबकुछ दुरुस्त था, लेकिन जब इसे जमीन पर इंप्लीमेंटेशन की बात आई, तो भारी चूक हुई। हम उसे सही तरीके से लागू करने में पूरी तरह नाकाम रहे। कमिश्नर का यह आक्रामक आत्ममंथन यह साफ करता है कि अधिकारियों ने सिर्फ वातानुकूलित कमरों में बैठकर नीतियां बनार्इं, लेकिन जमीन पर नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने में लापरवाही बरती गई। इस साल की विफलता से सबक लेते हुए कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने मनपा के ढीले रवैये को बदलने के लिए एक बड़ा पैâसला लिया है। अब मनपा मानसून का इंतजार नहीं करेगी और अब एडवांस प्लानिंग करेगी, अगले साल (२०२७) के मानसून के लिए तैयारियां जनवरी महीने से ही शुरू कर दी जाएंगी।

मुंबईकरों का मनपा के प्रति गुस्सा
कांदिवली निवासी निमेष शाह ने कहा, ‘कमिश्नर का कबूलनामा हमारी परेशानी नहीं घटाता। हर साल सड़कें डूबती हैं, लोकल ठप होती है और करोड़ों रुपए टैक्स देने के बावजूद मुंबईकरों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।’

कुर्ला से सामाजिक कार्यकर्ता अशोक गायकवाड़ ने कहा हर साल मानसून से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं कि नाला सफाई हो गई। अगर सफाई हुई थी, तो पहली ही बारिश में गंदा पानी हमारे घरों और दुकानों में वैâसे घुस गया?

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