सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। शिवसेना उपनेता सुषमा अंधारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुला पत्र लिखकर उनके विधानसभा भाषण और विपक्ष पर की गई टिप्पणियों को लेकर तीखा हमला बोला है। अंधारे ने मुख्यमंत्री को घेरते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने मिसिंग लिंक पर उठाए गए सवालों का जवाब देने के बजाय आलोचकों के लिए ‘कुत्ते’ और ‘भाड़े के टट्टू’ जैसी अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया, जो संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।
अंधारे ने कहा कि जनता के पैसों से बने ७,१२० करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर सवाल पूछना विपक्ष या जनता का अधिकार है। अगर इस प्रोजेक्ट पर कोई हादसा होता और जनहानि होती, तो जिम्मेदारी किसकी होती? अंधारे के मुताबिक, मिसिंग लिंक के उद्घाटन के समय इस प्रोजेक्ट का श्रेय लेने की होड़ थी, लेकिन अब जब उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार जवाबदेही से बच रही है। हाल में मिसिंग लिंक पर भूस्खलन के बाद विपक्ष ने प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और खर्च पर सवाल उठाए थे।
सुषमा अंधारे ने फडणवीस को उनके पुराने बयान की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने विपक्ष में रहते हुए कहा था कि ‘सत्ताधारी यह भ्रम निकाल दें कि वे ही महाराष्ट्र हैं।’
क्या यही नियम अब सीएम पर लागू नहीं होता?
अंधारे ने सवाल किया कि क्या यही नियम अब मुख्यमंत्री पर लागू नहीं होता? उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछना महाराष्ट्र का अपमान नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी प्रक्रिया है।
अंधारे ने पत्र में कानून-व्यवस्था, पेपर लीक, महिला सुरक्षा, छात्रों और कर्मचारियों के आंदोलनों जैसे मुद्दों पर सरकार की चुप्पी को भी घेरा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का अपमान तब होता है जब शिवाजी महाराज की प्रतिमा को लेकर लापरवाही होती है, जब राज्यपाल या अन्य नेता महापुरुषों पर आपत्तिजनक बयान देते हैं, जब महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा विफल होती है, जब ड्रग्स के मामले सामने आते हैं और जब बड़े उद्योग महाराष्ट्र से बाहर चले जाते हैं।
