बर्खास्तगी और बदले की कथित कहानी अदालत की दहलीज तक वैâसे पहुंची
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी अदालत में जजों को ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’ कहने, उन्हें कथित तौर पर आदेश देने, सुनवाई के बीच कागज उछालने और मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपशब्द बोलने वाला प्रबल प्रताप आखिर कौन है? सुप्रीम कोर्ट में हुए इस अभूतपूर्व हंगामे के पीछे लखनऊ की एक सॉफ्टवेयर कंपनी से शुरू हुआ पुराना विवाद बताया जा रहा है। प्रबल प्रताप उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के भरथना क्षेत्र का रहने वाला बताया जाता है। वह तकनीकी क्षेत्र से जुड़ा था और लखनऊ के विकास नगर स्थित एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी में काम कर चुका था। मीडिया रिपोर्टों और मामले से जुड़े दावों के अनुसार नौकरी के दौरान एक महिला सहकर्मी से उसका विवाद हुआ, जिसके बाद कंपनी प्रबंधन ने उसे सेवा से हटा दिया।
महिला सहकर्मी को परेशान करने के आरोप
बताया गया है कि प्रबल प्रताप अपनी एक सहकर्मी को लगातार आपत्तिजनक, धमकी भरे और गाली-गलौज वाले ई-मेल भेज रहा था। महिला ने इसकी शिकायत कंपनी प्रबंधन से की। आरोप है कि कंपनी ने पहले उसे चेतावनी दी, लेकिन व्यवहार में सुधार नहीं होने पर नौकरी से बर्खास्त कर दिया। हालांकि महिला की शिकायत, ई-मेल और बर्खास्तगी से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। पुलिस रिपोर्ट आने के बाद उससे आरोपों के समर्थन में शुरुआती साक्ष्य मांगे गए। उपलब्ध सामग्री के आधार पर अदालत ने तत्काल एफआईआर का आदेश देने के बजाय उसकी अर्जी को परिवाद यानी कंप्लेंट केस के रूप में दर्ज कर लिया। इसका अर्थ यह था कि प्रबल प्रताप को पहले अदालत के सामने अपने गवाह और प्रमाण प्रस्तुत करने थे। लेकिन निचली अदालत में साक्ष्य रखने के बजाय उसने आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में चुनौती दे दी। प्रबल प्रताप ने हाई कोर्ट से मांग की कि कंप्लेंट केस की प्रक्रिया रद्द कर पुलिस को सीधे एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कथित रूप से कहा कि मामला निचली अदालत में लंबित है और याचिकाकर्ता को अपने तथ्य तथा प्रमाण वहीं रखने चाहिए।
नौकरी जाने के बाद शुरू हुई कानूनी जंग
आरोप है कि नौकरी से निकाले जाने के बाद प्रबल प्रताप ने कंपनी पर साइबर अपराध और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप लगाए। उसने नवंबर २०२५ में लखनऊ की अदालत से कंपनीऔर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था?
शुक्रवार १० जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में प्रबल प्रताप ने खुद याचिकाकर्ता के रूप में बहस की। सुनवाई के दौरान उसने पीठ के न्यायाधीशों को कथित तौर पर ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’ कहकर संबोधित किया और कहा कि वह उन्हें आदेश देता है। अदालत की आपत्ति के बाद उसने खुद को ‘सॉवरेन’ यानी संप्रभु बताने का दावा किया। इसके बाद उसने कागजों का पुलिंदा अदालत में उछाल दिया।
