-सांभर की सहजन और ‘बनाना वड़ा’ के केले पर फफूंद
-मुंबई के ६० साल पुराने पूर्णिमा रेस्तरां का लाइसेंस निलंबित
सामना संवाददाता / मुुंबई
दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में छह दशक से अधिक पुराने और मशहूर उडुपी रेस्तरां ‘पूर्णिमा’ पर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। गंभीर खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता उल्लंघन मिलने के बाद रेस्तरां का एफएसएसएआई लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
राजा बहादुर कंपाउंड में स्थित यह रेस्तरां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, बॉम्बे हाउस और मुंबई हाई कोर्ट आने-जाने वाले लोगों के बीच लंबे समय से लोकप्रिय रहा है। २३ जुलाई को खाद्य सुरक्षा अधिकारी आर. एस. सूर्यवंशी ने यहां निरीक्षण किया था। जांच के दौरान रसोई और भंडारण व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने अधिकारियों को भी चौंका दिया। एफडीए के अनुसार, सांभर में इस्तेमाल होने वाली सहजन की फलियों तथा रेस्तरां के खास ‘बनाना वड़ा’ में प्रयोग होने वाले केलों पर फफूंद लगी मिली। दूषित कच्ची सामग्री को पके हुए और जमे खाद्य पदार्थों के साथ रखा गया था। रसोई में मक्खियां, जमा हुआ पानी, गंदी नालियां, जंग, उखड़ता रंग और कॉकरोच रोकने की व्यवस्था का अभाव भी पाया गया।
इसके अलावा कर्मचारियों की चिकित्सकीय फिटनेस और नियमित स्वास्थ्य जांच के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। रेप्रिâजरेटर के दरवाजे ठीक से बंद नहीं होते थे और अचार रखने के लिए गैर-खाद्य श्रेणी के प्लास्टिक ड्रम इस्तेमाल किए जा रहे थे। एफडीए ने चेताया कि इडली-दोसा का घोल अम्लीय होता है और फफूंद से दूषित रसोई में इसे तैयार करना लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। अब कमियां दूर होने और दोबारा जांच के बाद ही रेस्तरां को संचालन की अनुमति मिल सकेगी।
दूध विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबन पर हाई कोर्ट की रोक, एफडीए की कार्रवाई को बताया ‘कठोर’
मुंबई हाईकोर्ट की पीठ ने कुछ दूध विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के लाइसेंस निलंबित करने के महाराष्ट्र एफडीए के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि बिना सुधार नोटिस जारी किए और संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए सीधे लाइसेंस निलंबित करना कठोर कार्रवाई है। जस्टिस एस. सी. चपलगांवकर ने प्रथम दृष्टया माना कि निरीक्षण में मिली कमियां इतनी गंभीर नहीं थीं कि दूध प्रसंस्करण इकाइयों को तत्काल बंद करना जरूरी हो। अदालत ने कहा कि एफडीए की कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, २००६ की धारा ३२ में तय प्रक्रिया के अनुरूप नहीं दिखती। एफडीए ने मिलावट, कृत्रिम दूध और अन्य उल्लंघनों का हवाला देकर लाइसेंस निलंबित किए थे। वहीं याचिकाकर्ताओं का दावा था कि टूटी टाइलों और खुली नाली जैसी मामूली कमियों को आधार बनाकर कार्रवाई की गई तथा उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला। मामले की अगली सुनवाई बाद में होगी।
सीसीआई की रसोई में कॉकरोच-फफूंद, खाद्य लाइसेंस निलंबित
प्रतिष्ठित क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (सीसीआई) की वैंâटीन में गंभीर गंदगी मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने उसका एफएसएसएआई लाइसेंस तत्काल निलंबित कर दिया। २७ जुलाई के निरीक्षण में रसोई और कचरा क्षेत्र में जिंदा कॉकरोच तथा मक्खियां मिलीं। सब्जियों पर फफूंद, जरूरत से ज्यादा पके मशरूम और समय-सीमा पार खाद्य सामग्री भी बरामद हुई। कोल्ड स्टोरेज में रखे खाने पर पानी टपक रहा था और नालियां जाम थीं। अधिकारियों ने पाया कि शाकाहारी और मांसाहारी भोजन बनाने की जगह अलग नहीं थी। कई खाद्य पदार्थ बिना लेबल के रखे थे तथा बर्तन जमीन पर धोए जा रहे थे। मुंबई में जांची गई सात क्लब वैंâटीनों में से पांच के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
