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मुंबई में ‘लव ट्रैप’ का आतंक!

शादी का वादा बना अपराधियों का नया हथियार

-६ महीने में १७९ महिलाओं से धोखा

-पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

फिरोज खान / मुंबई

मुंबई में प्यार और शादी के नाम पर महिलाओं को जाल में फंसाने वाले अपराधियों का नेटवर्क तेजी से पैâलता नजर आ रहा है। मुंबई पुलिस के छह महीने के अपराध आंकड़ों ने चौंकानेवाली तस्वीर पेश की है। ‘शादी का झूठा वादा’ कर महिलाओं से दुष्कर्म और धोखाधड़ी के मामलों में ४२ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। बढ़ते ‘लव ट्रैप’ ने न केवल महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सरकार और पुलिस के सुरक्षा दावों की भी पोल खोल दी है।
हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि महिलाओं की सुरक्षा बुरी तरह खतरे में पड़ गई है। इसके बावजूद साइबर पुलिस अपराधों को नियंत्रित करने में नाकाम साबित हो रही है। सरकार के दावे भी खोखले साबित हो रहे हैं। सवाल यह है कि महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे कहां गए? मुंबई पुलिस के ३० जून तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल रेप के ४५६ केस दर्ज हुए। शादी का झांसा देकर महिलाओं की इज्जत लूटने की घटनाएं सबसे ज्यादा बढ़ी हैं। पिछले साल १२६ केस थे, इस साल १७९ केस। यानी ५३ मामले बढ़े हैं। प्यार और शादी के नाम पर महिलाओं के साथ ठगी के अलावा बलात्कार भी किया जा रहा है। महिलाओं का अपमान करने के केस पिछले साल की तुलना में ४४० से बढ़कर ५५९ हो गए। दहेज उत्पीड़न शारीरिक और मानसिक क्रूरता के केस २४६ से बढ़कर २६० हुए। किडनैपिंग की घटनाएं ६६९ हुई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें ६६४ नाबालिग लड़कियां शामिल हैं।
कुल मिलाकर सरकार ‘बेटी बचाओ’ के नारे लगाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अपराधियों ने अपना तरीका बदल लिया है। अब वे चाकू की जगह ‘झूठे वादे’ का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस है कि बेबस बनकर खड़ी है। ज्यादातर शादी का झांसा वाले केस डेटिंग ऐप और इंस्टाग्राम से शुरू होते हैं। साइबर सेल की निगरानी नाकाफी है। जागरूकता सिर्फ कागजों पर है। स्कूल-कॉलेज में महिलाओं को कानूनी अधिकार और रिलेशनशिप प्रâॉड के बारे में जागरूक बनाने के लएि कोई ठोस अभियान नहीं चलाया जा रहा। सबसे अहम बात यह है कि केस दर्ज करने में पुलिस आनाकानी करती है। कई पीड़िताएं बताती हैं कि पुलिस पहले ‘प्रेम प्रसंग’ कहकर एफआईआर दर्ज करने में टाल-मटोल करती है।

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