मुख्यपृष्ठस्तंभरौबीलो राजस्थान :  सरकारी स्कूल बनाम प्राइवेट स्कूल

रौबीलो राजस्थान :  सरकारी स्कूल बनाम प्राइवेट स्कूल

बुलाकी शर्मा, राजस्थान

`दांत है तो चीणा कोनी चीणा है तो दांत कोनी। आपांरै राजस्थान रै शिक्षा महकमै री अजब लीला है भाईजी।’ मास्साब-बैनज्यां ल्याई वैâई दिनां सूं स्कूल-प्रवेशोत्सव में घर-घर जाय’र टाबरां रो अ‍ेडमिशन सरकारी स्कूल्यां में करावण री अरदास करी। फेर ई काळू म्हाराज‌ रो इयां भूंडणो म्हनैं अखरियो। आकरै सुर में वैâयो, `कांई कमी है सरकारी स्कूल्यां अर सरकारी महकमै में?’
‌काळू म्हाराज रो सुर म्हासूं ई तीखो, `राजस्थान में ७,२०० स्कूल्यां में फकत अ‍ेक-अ‍ेक मास्टर है अर १४० स्कूल्यां में पढ़णियां री संख्या जीरो बट्टा जीरो है, पण बठै १८९ मास्साब अर बैनज्यां डिप्टी देय रैया है।’
काळू म्हाराज‌ म्हनैं चैलेंज करता आगै बोल्या, `और देश में रोजीना १३ स्कूल्यां बंद हुय रैई है। अ‍े सगळा आंकड़ा यूडाइस रिपोर्ट बरस २०२५-२६ रा है। अबै क्या वैâवो?’ आपरी बात नैं भरोसेमंद अर वजनी बणावण सारू आंकड़ां रो छमको लगाइज्या करै। आंकड़ा आपरै हिसाब सूं काम में लिरीजै। आंकड़ा आकड़ै रूप राखीज सवैâ अर पुहुप उनमान ई।‌ हुंस्यार आंकड़ैबाज बहसबाजी में बाजी मार लैवै। तलवार अर ढाल, दोनूं रूप‌ म्हैं आंकड़ा काम में लेवणा जाणूं। काळू म्हाराज री बात्यां रो तोड़ ई है। जिकी स्कूल्यां में टाबर कोनी अर फकत मास्टर तिणखा लेय रैया है, बीं नैं पॉजिटिव रूप में देखणो चाइजै। टाबर बठै सरकारी री ठौड़ प्राइवेट स्कूल्यां में पढ़ै। पढ़ै तो है नीं। प्राइवेट स्कूल्यां सूं बेरोजगारां नैं रोजगार मिल रैयो है। गार्जियंस‌ आपरै टाबरां नैं ऊंची फीस में बठै पढ़ा’र आपरो स्टेटस मेनटेन कर रैया है। अबै रैया खाली सरकारी स्कूल अर खाली तिखा लेवणिया मास्टरजी। जर्जर अर खस्ताहाल स्कूल भवनां री खबरां आयै दिन बांचा। आयै दिन बां रै पड़न री, जान वैâ माल रो नुकसान हुवण रा समंचार सुणा। ना हुवैला बांस, ना बाजैला बांसरी। खस्ताहाल स्कूल काल पड़ता आज पड़ो। टाबरां रै खरोंच ई कोनी आवणी। अर मास्टरां नैं पढ़ावण नैं छोड’र‌ दूजी घणी ई जिम्मेदारियां सरकार देय राखी है। तिणखा रो हक सरकार लेवणो जाणै। काळू म्हाराज सूं म्हैं सवाल करियो, `थांरै हलवैâ री अ‍ेक स्कूल में अ‍ेक ई टाबर रो अ‍ेडमिशन कोनी हुयो। आपरै तीन पोता-पोती है, बे कठै पढ़ै।’ `इंग्लिश मीडियम री प्राइवेट स्कूल में।’ बां गीरबै सूं जवाब दियो। `थे तो वार्ड पार्षद रैयोड़ा हो, थां रो बेटो सरकारी मास्टर है फेर ई पोता-पोतियां नैं थे सरकारी स्कूल में कोनी पढावो अर दोष ई सरकारी स्कूल्यां में काढ़ रैया हो। इयां कियां म्हाराज।’
म्हाराज मून।

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