सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की शिक्षा व्यवस्था का सच एक बार फिर सामने आ गया है। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के हजारों स्कूलों में आज भी बिजली, इंटरनेट, शौचालय, खेल का मैदान और दिव्यांग छात्रों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा का विस्तार हुआ है, लेकिन स्कूलों में बुनियादी ढांचे की कमी बरकरार है।
राज्य में हैं कुल १.८ लाख स्कूल
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में कुल १,०८,१३९ स्कूल हैं, जिनमें २,१६,३२,६६९ छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें १,११,६२,४५७ छात्र और १,०४,७०,२१२ छात्राएं हैं। राज्य में कुल ७,५०,२७२ शिक्षक कार्यरत हैं। दिव्यांग छात्रों के लिए हालात और ज्यादा चिंताजनक हैं। ३२,२२८ स्कूलों में दिव्यांग छात्रों के लिए अलग शौचालय नहीं है। १६,३४१ स्कूलों में हैंडरेल के साथ रैंप नहीं है। इसकी वजह से शारीरिक दिक्कत वाले छात्रों को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी होती है।
२४ हजार स्कूलों में इंटरनेट नहीं
डिजिटल शिक्षा के लिए जरूरी सुविधाएं भी कई जगह अधूरी हैं। ९०,४१९ स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा है, लेकिन सिर्फ ८४,५३० स्कूलों में ही कंप्यूटर काम कर रहे हैं। इसके अलावा २३,८५५ स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा ही नहीं है। इसलिए छात्रों को डिजिटल शिक्षा का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। बिजली सप्लाई की हालत भी ठीक नहीं है। राज्य के ९३,९९९ स्कूलों में बिजली का सिस्टम ठीक है। लेकिन, ३,२०१ स्कूलों में बिजली का कनेक्शन नहीं है, जबकि १०,९३८ स्कूलों में बिजली का कनेक्शन है लेकिन वह काम नहीं कर रहा है।
९४ हजार स्कूल सुविधाओं से दूर
टॉयलेट की बात करें तो कई जगहों पर उनकी हालत बहुत खराब है। राज्य में २,०१९ लड़कियों और ३,२८० लड़कों के टॉयलेट मरम्मत, पानी की कमी या मेंटेनेंस की कमी के कारण अब इस्तेमाल करने लायक नहीं हैं। कई स्कूलों में खेल और पढ़ने के लिए जरूरी सुविधाओं की भी कमी है। ३,९३२ स्कूलों में खेलने के मैदान नहीं हैं, जबकि १,०९९ स्कूलों में लाइब्रेरी या बुक बैंक की सुविधा नहीं है। बाकी ९४,५८९ स्कूल इस सुविधा से वंचित हैं।
