-मनमोहन सिंह
पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह होना जरूरी
सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) और ‘कॉमनकॉज’ की एक व्यापक अध्ययन रिपोर्ट, स्टेट्स ऑफ पोलिसिंग इन इंडिया रिपोर्ट ने भारतीय पुलिस बल की मानसिकता, कार्यप्रणाली और प्रणालीगत समस्याओं पर एक महत्वपूर्ण और चिंताजनक प्रकाश डाला है। इस रिपोर्ट का सबसे मुख्य और चर्चित निष्कर्ष यह है कि देश के ७० प्रतिशत से अधिक पुलिसकर्मी यह मानते हैं कि गंभीर मामलों या अपराधियों के खिलाफ बिना किसी कानूनी/प्रशासनिक सजा के डर के बल प्रयोग (हिंसा या अतिरिक्त बल) की अनुमति होनी चाहिए।
ये आंकड़े भारतीय पुलिसिंग व्यवस्था की लोकतांत्रिक और संवैधानिक बुनियाद पर कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
कानून के शासन (रूल ऑफ लॉ ) की चुनौती: भारत का संविधान और न्याय प्रणाली हर नागरिक को न्यायसंगत सुनवाई का अधिकार देती है। जब पुलिसकर्मी स्वयं बल प्रयोग को न्याय का साधन मानने लगते हैं, तो यह व्यवस्था कानून के शासन के बजाय ताकत के शासन की ओर झुकने लगती है। कस्टोडियल वायलेंस (हिरासत में हिंसा) और फर्जी एनकाउंटर जैसी घटनाएं इसी मानसिकता का परिणाम मानी जाती हैं।
कार्य-दबाव और संसाधनों की कमी: रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पुलिसकर्मी भारी शारीरिक और मानसिक तनाव में काम करते हैं। औसतन वे १४ से १६ घंटे की शिफ्ट में काम करते हैं उनके पास पर्याप्त प्रशिक्षण, आधुनिक हथियार और बुनियादी सुविधाएं नहीं होती हैं। लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से बचने तथा त्वरित न्याय देने की जन-अपेक्षाओं के दबाव में अक्सर पुलिस बल प्रयोग को ही सबसे आसान रास्ता समझ लेती है।
संस्थागत और पुलिस सुधारों की आवश्यकता: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रकाश सिंह मामले (२००६) में दिए गए दिशा-निर्देशों के बावजूद देश में जमीनी स्तर पर पुलिस सुधार प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाए हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप और पुलिस की जवाबदेही का अभाव इस मानसिकता को और बढ़ावा देता है।
पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य नागरिकों की रक्षा करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना है, न कि स्वयं न्यायाधीश बनना। ७० फीसदी पुलिसकर्मियों की यह धारणा स्पष्ट संकेत देती है कि केवल पुलिस बल बढ़ाना या आधुनिक उपकरण देना ही पर्याप्त नहीं है। भारत को एक पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह पुलिस प्रणाली की आवश्यकता है। इसके लिए मानवाधिकारों पर विशेष प्रशिक्षण, कार्य के घंटों का नियमन, न्यायिक जवाबदेही सुनिश्चित करना और व्यापक पुलिस सुधारों को लागू करना बेहद अनिवार्य है।
