नवीन सी. चतुर्वेदी
-या कों नैंक उदाहरण सहित समझाय सकै का?
-मछलियों के हक में बगुलों की जमात
हां बत्तो, क्यों नांय समझाय सकों? बड़ी आसानी सों समझाय सकों। बोल लोकल लेवल ते समझाओं, स्टेट लेवल ते, नेशनल लेवल ते या इंटरनेशनल लेवल ते? नांय नांय घुटरू, ओखली में सर क्यों देंय? न लोकल, न स्टेट, न नेशनल; तू तौ मोय इंटरनेशनल लेवल ते समझाय!
ठीक है बत्तो तौ एक-एक कर कें सुन। सबसों पहलें तौ ट्रंप बाबू की कहानी सुनाओं। ट्रंप बाबू नें ढोल तासे नगाड़े सब के सब बजवाय कें कही हुती कि मैं चौबीस घंटे के अंदर रूस और यूक्रेन वाला युद्ध समाप्त करवा कर दुनिया में शान्ति की स्थापना कर दूंगा। मगर कियौ का? पूरी की पूरी दुनिया कौ सुख चैन छीन लियौ!
अब दूसरी कहानी सुन, यूक्रेन वारे जेलेन्सकी की। वानें हू डंका की चोट पै कही हुती कि मैं केवल लोकतन्त्र, वैश्विक शांति और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लड़ रहा हूं। मगर कियौ का – ढाई साल है गये, चुनाव करवायवे कौ नाम ही नांय लै रह्यौ!
तीसरी कहानी इजरायल के नेतन्याहू की सुन। वा पठ्ठा नें हू गाय बजाय कें कही हुती कि इजरायल की सेना दुनिया की सबसे नैतिक सेना है और हमारा मकसद सिर्फ आम नागरिकों की रक्षा करना है। दर्पण झूठ न बोले। वाके देस के लोग ही बतामें हैं कि अदालत वाके इसारे’न पै फैसला सुनावै है।
अब पुतिन की सुन। पुतिन बाबू बोले हुते कि हम यूक्रेन को नाजीवाद से मुक्त करेंगे और वहां के रूसी भाषी लोगों की रक्षा करेंगे। हकीकत यै है कि रूसी भाषी अब रूस में हू डर-डर कें जी रहे हैं।
घुटरू या समस्या कौ समाधान का है?
बत्तो, अपुन ठहरे आशावादी लोग! भगवान भरोसें जीवे वारे लोग! सो बस, आसा करें कि कल्कि अवतार जल्दी सों जल्दी होय! मगर होय परौसी के घर में! अपने घर में नांय! वौ ही तेरी बात, ओखली में सर कौन देय! जैसें द्वापर में कन्हैया नें कालिया नाग नाथौ हुतो, नारायण ही फिर सों कोऊ अवतार लै कें इन कलियुगी बगुलाभगत’न कौ इलाज कर सकें! कछू चमत्कार भयौ तौ नमस्कार तौ अपुन लोग कर ही लंगे! है कि नाँय?
मछलियों के हक में बगुलों की जमात
किस कदर है मुझको हैरानी, न पूछ
