मुख्यपृष्ठस्तंभतरकश : कौन है जिम्मेदार, एक ढूंढो मिलेंगे हजार

तरकश : कौन है जिम्मेदार, एक ढूंढो मिलेंगे हजार

धनुर्धर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जो इडियट होता है, उसका सच से कोई लेना-देना नहीं होता…। बस सत्ता पक्ष ने आपत्ति कर दी, ‘आप यह शब्द नहीं बोल सकते।’ राहुल बोले, ‘भई मैं आप लोगों को इडियट नहीं कह रहा।’ मगर सत्ता पक्ष के सदस्य हंगामा करते रहे। मानो कह रहे हों, ‘हम खूब समझते हैं कि आप किसे इडियट बोल रहे हैं। हम क्या इडियट हैं जो इतना भी न समझें कि इस देश में इडियट कौन है?’ वे जानते थे, इसलिए आहत थे।
नोटिस नहीं दिया
सारी मुश्किल जानने से ही होती है। चूंकि आप जान रहे होते हैं इसलिए डरते हैं कि जो आप जानते हैं, वह सब लोग न जान जाएं। नए शिक्षा मंत्री भी जानते हैं कि उनके बारे में कौन-सी ऐसी बातें हैं, जो लोग नहीं जानते या जानते भी हों तो उन्हें याद नहीं। स्वाभाविक ही वह डरे हुए थे कि कोई न कोई सदन में उन बातों को दोहराकर सबको याद दिलाने लग जाएगा। इसलिए जैसे ही प्रियंका गांधी ने यह याद दिलाया कि नए शिक्षा मंत्री ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने एक गर्भवती महिला के रेपिस्टों की समयपूर्व रिहाई पर अपनी सहमति व्यक्त की थी, हंगामा मच गया। आपत्ति करने वालों में सबसे आगे खुद शिक्षा मंत्री ही थे। उन्हें मुख्य शिकायत यह नहीं थी कि उनके बारे में एक झूठी बात कही जा रही है, ज्यादा तकलीफ इस बात को लेकर थी कि प्रियंका गांधी ने यह कहने से पहले उन्हें नोटिस नहीं दिया था।
मंत्री जी की तकलीफ
हालांकि, कुछ सदस्यों ने प्रियंका के आरोप को निराधार भी कह दिया था जोश-जोश में, इसलिए वह अपने आरोप का आधार बताने और उसे प्रमाणित करने को तैयार हो गर्इं। वह तो अध्यक्ष महोदय ने जैसे-तैसे उन्हें रोका। लेकिन रही-सही कसर सोशल मीडिया ने पूरी कर दी उस समय के अखबारों की कटिंग और टीवी इंटरव्यू की वीडियो क्लिपिंग वायरल करके। बहरहाल, मंत्री जी अपनी तकलीफ छोड़ने को तैयार नहीं। आखिर उन्हें नोटिस नहीं दिया था प्रियंका ने संसद में बोलने से पहले। पूछने वाले पूछ रहे हैं कि जो कुछ खुद मंत्री महोदय ने बोला था गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई पर, क्या उससे पहले बलात्कार पीड़िता को नोटिस दिया था?
माहौल बदल गया
लेकिन, लोग भूल जाते हैं। उन्होंने संसद में नहीं, मीडिया के सामने बयान दिया था। और यह भी तो देखिए, तब माहौल वैâसा था। उस माहौल में वह बयान पार्टी को चुनाव में लाभ दिलाने वाला था। अभी न तो चुनाव है और न ही वैसा माहौल है। माहौल तो पूरा जेन जी मय हो रखा है। और जेन-जी को कहां हिंदू-मुस्लिम से कोई मतलब। वह तो मीम बनाकर ही खुश हो जाती है। ऐसे माहौल में उस पुराने बयान की याद दिलाने से क्या-क्या हो सकता है, यह नए शिक्षा मंत्री अच्छे से जानते हैं। इसीलिए परेशान हैं।
सदन से गायब
परेशान गृहमंत्री महोदय भी हैं। हालांकि वह तो सदन में भी नहीं थे। जानबूझकर नहीं गए। जाते तो उन्हें देखकर विपक्ष वैसे ही बिफर उठता। उसके उकसाने पर उन्हें भी कुछ न कुछ बोलना पड़ जाता। और फिर जो आग मुश्किल से ठंडी पड़नी शुरू हुई है, दोबारा भड़क उठती। सो, जनहित में और राष्ट्रहित में वह पूरे समय सदन से गायब रहे। लेकिन नेता प्रतिपक्ष फिर भी नहीं पसीजे। उन्होंने कह दिया कि दिल्ली में आंदोलनकारी युवाओं पर जो पुलिस बर्बरता हुई है, उसके लिए गृहमंत्री ही जिम्मेदार हैं।
कैसे बता देते
सत्ता पक्ष फिर उबल पड़ा। आप बगैर किसी जानकारी के इतनी बड़ी बात वैâसे बोल सकते हैं? विपक्ष के सदस्य निवेदन करते रहे कि ठीक है अगर गृहमंत्री जिम्मेदार नहीं हैं तो आप बता दो कि कौन जिम्मेदार है? लेकिन सत्ता पक्ष के सदस्यों ने यह नहीं बताया। क्यों बताते? जैसे ही बता देते विपक्षी सदस्यों को पता चल जाता। फिर सत्ता पक्ष यह कैसे कहता कि आपको कुछ पता ही नहीं है।
तरह-तरह की जानकारी
जो भी हो, गृहमंत्री गैरजिम्मेदार नहीं हैं। वह खुद भले ही चुप हों, उनके सूत्र मीडिया के जरिए तरह-तरह की जानकारी मुहैया करा रहे हैं लोगों को। कभी बताया जाता है कि पैलेट गन तो आरएएफ ने चलाई थी, जो सीआरपीएफ के अधीन है। फिर सीआरपीएफ के महानिदेशक कह भी देते हैं कि अपने जवानों के सारे किए-धरे की जिम्मेदारी वे खुद स्वीकार कर लेंगे। इसी रास्ते यह भी बता दिया जाता है कि फलां डीसीपी ने दी थी पैलेट गन इस्तेमाल की इजाजत। पार्टी की तरफ से यह भी कहा जाता है कि फायरिंग वगैरह का आदेश मंत्री नहीं दिया करते, वह तो मजिस्ट्रेट देता है।
पकड़ ली है जिद
गौर कीजिए, सरकार कितने सारे विकल्प दे रही है। आप इनमें से जिसे चाहो जिम्मेदार मान लो। वह तो विपक्ष है, जो यह जिद ठाने बैठा है कि गृहमंत्री को ही जिम्मेदार मानेगा। आप ही बताइए यह राजनीति नहीं तो और क्या है।
(लेखक, वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार हैं।)

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