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नई मुंबई की ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’  की शर्तों पर गंभीर सवाल… अदालत की सिडको को फटकार… घर गरीबों के लिए हैं या अमीरों के लिए?

सामना संवाददाता / नई मुंबई

मुंबई हाई कोर्ट ने सिडको द्वारा नई मुंबई में ‘मेरी पसंद का सिडको घर’ के तहत ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ की शर्तों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने सिडको से स्पष्ट पूछा कि ये घर गरीबों के लिए हैं या अमीरों के लिए? प्रभारी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड के खंडपीठ ने इस पूरी योजना की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
मुख्य बिंदु और विवाद के कारण आय की सीमा
नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लोगों के लिए होता है, जिनकी वार्षिक आय ३ लाख से ६ लाख रुपये तक हो। हालांकि, सिडको ने ६५प्रतिशत घरों के लिए न्यूनतम वार्षिक आय ६ लाख रुपये तय की, लेकिन अधिकतम आय की कोई सीमा तय नहीं की। अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि अधिकतम आय की कोई सीमा नहीं है, तो न्यायाधीश और अन्य संपन्न वर्ग भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
घर की उपलब्धता और कीमत
सिडको ने नई मुंबई में इस योजना के अंतर्गत घरों की कीमतें ७५ लाख रुपये या उससे अधिक रखी हैं, जो कि सामान्य गरीब वर्ग की पहुंच से बाहर हैं।
योजना के नियमों के तहत शर्त रखी गई थी कि आवेदक का केवल नवी मुंबई में पक्का मकान नहीं होना चाहिए। अदालत ने इस शर्त को मनमाना बताया और कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि दक्षिण मुंबई या वर्ली जैसे महंगे इलाकों में पक्का मकान रखने वाले लोग भी नई मुंबई में इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

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