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जीवन दर्पण: जीवन की बाधाएं दूर करने के लिए करें पीपल के पेड़ की परिक्रमा!

काशी के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्विद
-डॉ. बालकृष्ण मिश्र
विद्यावारिधि (पी.एच.डी-काशी)

गुरुजी, मेरी कुंडली में दोष क्या है और मेरा करियर वैâसा होगा, कोई उपाय है तो कृपया बताएं?
-सौरभ भारद्वाज
(जन्म: १९ जून २००२, रात्रि १२:५९, घाटकोपर वेस्ट)
सौरभ जी, आपका जन्म बुधवार के दिन हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है और आपकी राशि कन्या बनती है। आपका जन्म मीन लग्न में हुआ है। मीन लग्न के स्वामी बृहस्पति दशम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव में स्थित हैं और अपनी पूर्ण सप्तम दृष्टि से दशम भाव को देख रहे हैं। इसलिए आपके करियर में माता-पिता का आशीर्वाद और उनकी सलाह महत्वपूर्ण रहेगी। यदि आप उनके मार्गदर्शन को सम्मानपूर्वक स्वीकार करेंगे तो करियर में बेहतर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आपकी कुंडली में भाग्य ग्रहण दोष और कालसर्प योग भी बन रहा है। साथ ही कुंडली मांगलिक होने के कारण विवाह एवं जीवनसाथी के चयन में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं। करियर और वैवाहिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए माता-पिता की सलाह को महत्व देना आपके लिए लाभकारी रहेगा। कालसर्प योग की वैदिक विधि से शांति कराने पर भी विचार किया जा सकता है। जीवन के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड कुंडली बनवाना उपयोगी रहेगा।
गुरुजी, मेरे जीवन में बहुत परेशानियां हैं। ये कब तक ठीक होंगी और इसके लिए मुझे क्या उपाय करने चाहिए?
-सुभाष पलांडे
(जन्म: २६ जनवरी १९९१, रात्रि १२:५५ बजे, भांडुप)
सुभाष जी, आपका जन्म शनिवार के दिन रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण में हुआ है और आपकी राशि वृषभ बनती है। आपकी कुंडली में चंद्रमा अष्टम भाव में सप्तम भाव के स्वामी के साथ स्थित है। इस स्थिति के कारण वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव और मानसिक परेशानियां आने की संभावना बनती है। कुंडली में मांगलिक प्रभाव भी दिखाई देता है। वर्तमान समय की बात करें तो आपकी कुंडली में राहु की महादशा और राहु में मंगल का अंतर चल रहा है। यह समय आपके लिए संघर्ष और परेशानियां बढ़ाने वाला हो सकता है। हालांकि, उचित उपायों और धैर्य से परिस्थितियों में धीरे-धीरे सुधार आने की संभावना है। समय को अनुकूल बनाने के लिए आपको ४३ दिनों तक प्रतिदिन लगभग ५ मिनट पीपल के पेड़ की परिक्रमा करनी चाहिए। साथ ही ४३ दिनों तक तालाब में मछलियों को चारा डालें। इन उपायों को श्रद्धा और नियमितता से करने पर आपकी परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगेंगी और परिस्थितियां अनुकूल होने की दिशा में बढ़ सकती हैं।

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