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सरकारी खजाने से `५४,२८२ करोड़ कहां गए? मोदी जी को मालूम ही नहीं!

-१५ मंत्रालयों में हुआ बड़ा गोलमाल?
-कैग रिपोर्ट ने खोला
सरकार का काला चिट्ठा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (वैâग) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोदी सरकार के १५ मंत्रालयों और विभागों की ओर से ५४,२८२.३२ करोड़ रुपए से संबंधित ३३,९७३ उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट- यूसी) अब तक जमा नहीं किए गए हैं। यह सार्वजनिक वित्त से जुड़े नियमों का उल्लंघन है और इससे यह गंभीर सवाल उठता है कि संबंधित धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए हुआ भी या नहीं।
अप्रैल में संसद में पेश किए गए वित्त मंत्रालय के वित्तीय लेखा-परीक्षण पर आधारित वैâग रिपोर्ट ‘वर्ष २०२४-२५ के लिए भारत सरकार के खातों पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट’ में कहा गया है कि १५ मंत्रालयों और विभागों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ३१ मार्च २०२५ तक ५४,२८२.३२ करोड़ रुपए की राशि से जुड़े ३३,९७३ उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित थे। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से ३८,२८७.५२ करोड़ रुपए से जुड़े १३,९२६ उपयोगिता प्रमाणपत्र पिछले तीन वित्तीय वर्षों (२०२१-२२ से २०२३-२४) के हैं।
विपक्ष की मांग, `हिसाब दे सरकार’
इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरते हुए सीधा सवाल दागते हुई कहा है कि जनता के पैसे का हिसाब सरकार को देना ही होगा। ३३,९७३ प्रमाणपत्रों के लंबित होने को लेकर विपक्ष ने वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, लंबित प्रमाणपत्र अपने आप में गबन का प्रमाण नहीं हैं, लेकिन सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग तेज हो गई है।

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