-मुंबई के कॉलेजों में दोगुनी-तिगुनी फीस वसूली का आरोप
-युवासेना ने शुल्क नियामक प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया
जेदवी / मुंबई
मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध कुछ महाविद्यालयों में मैनेजमेंट कोटा के नाम पर विद्यार्थियों से दोगुनी-तीनगुनी फीस वसूले जाने का मामला सामने आया है। विद्यार्थियों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद युवासेना ने शुल्क नियामक प्राधिकरण के समक्ष इस मामले को उठाते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़ा किया है।
शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे के पास विद्यार्थियों और अभिभावकों की शिकायतें पहुंची थीं। इसके बाद युवासेना सीनेट सदस्य प्रदीप सावंत और पूर्व सिनेट सदस्य राजन कोलंबेकर ने शुल्क नियामक प्राधिकरण के सदस्य सचिव समीर कुर्तकोटी (भा.प्र.से.) से मुलाकात कर उन्हें निवेदन सौंपा।
निवेदन में कहा गया है कि शैक्षणिक वर्ष २०२५-२६ में महाराष्ट्र सरकार और शुल्क नियामक प्राधिकरण की ओर से कुछ महाविद्यालयों को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में मैनेजमेंट कोटा के विद्यार्थियों से उनकी गुणवत्ता/मेरिट के आधार पर नियमित फीस की तुलना में दोगुनी से तीनगुनी फीस लेने की अनुमति दी गई थी। युवासेना का आरोप है कि नियमित शुल्क के अतिरिक्त ली जाने वाली राशि वैâपिटेशन फीस के दायरे में आती है और कानूनन इस पर रोक है।
युवासेना ने मांग की है कि पिछले वर्ष अधिक शुल्क लेने की अनुमति के निर्णय को तत्काल रद्द किया जाए और महाविद्यालयों को नियमित शुल्क लेने के आदेश दिए जाएं। साथ ही विद्यार्थियों के हित में उन्हें न्याय दिलाने की मांग की गई है।
इस पर शुल्क नियामक प्राधिकरण के सदस्य सचिव समीर कुर्तकोटी ने बताया कि विभाग इस मामले को लेकर फिलहाल संभ्रम में हैं। नवनियुक्त अध्यक्ष शेखर चन्ने के कार्यभार संभालने के बाद इस पर तत्काल निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष अधिक शुल्क लेने की अनुमति केवल प्रथम वर्ष के लिए दी गई थी।
पहले साल की अनुमति, दूसरे साल भी वसूली!
युवासेना के मुताबिक, इस अनुमति का कथित तौर पर गलत फायदा उठाते हुए कुछ महाविद्यालय अब उन्हीं विद्यार्थियों से दूसरे वर्ष में भी दोगुनी फीस वसूल रहे हैं। वडाला स्थित प्रसिद्ध विद्यालंकार इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का उदाहरण देते हुए बताया गया कि पिछले वर्ष मैनेजमेंट कोटा के तहत प्रवेश लेते समय विद्यार्थियों से करीब १.८० लाख रुपए नियमित शुल्क के अलावा ३.५० से ४ लाख रुपए तक लिए गए थे। अब इन्हीं विद्यार्थियों से दूसरे वर्ष में भी ३.५० लाख रुपए से अधिक फीस वसूले जाने की आशंका है। यानी चार वर्षीय पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों पर ७ लाख रुपए से अधिक का अतिरिक्त शुल्क पड़ सकता है।
