-धाराशिव में किसानों के नाम पर खेला गया करोड़ों का खेल; पहली बार इतनी बड़ी कार्रवाई
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में किसानों के लिए भेजी गई कृषि आदान अनुदान के वितरण में हुए २१ करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले ने कृषि विभाग को हिला दिया है। राष्ट्रीय अन्न सुरक्षा एवं पोषण अभियान के तहत खरीफ २०२५-२६ में बीज, खाद, सुरक्षा किट और अन्य कृषि सामग्री किसानों तक पहुंचाने के बजाय कागजों पर वितरण दिखाकर सरकारी धन निकालने के आरोपों के बाद १६ अधिकारी दोषी पाए गए, जिनमें से १४ अधिकारियों को बुधवार देर रात तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
कृषि विभाग के इतिहास में इसे अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक निलंबन कार्रवाई माना जा रहा है। दो अन्य अधिकारियों सेवानिवृत्त जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी राजकुमार मोरे और प्रभारी जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी महादेव आसलकर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच में सामने आया कि हजारों किसानों के नाम पर ४,५५० स्प्रे सुरक्षा किट वितरित दिखाए गए, जबकि वे किसानों तक पहुंचे ही नहीं।
करोड़ों की हेरा-फेरी
कई मामलों में फर्जी आवक-जावक रजिस्टर तैयार कर करोड़ों रुपए के बिल पारित किए गए। एकीकृत कीट प्रबंधन और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन योजनाओं में लगभग एक से डेढ़ करोड़ रुपये की संदिग्ध बिलिंग का भी खुलासा हुआ है। इतना ही नहीं, शेतकरी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए बिना उसके भी फर्जी बिल तैयार किए गए।
विधायक की शिकायत के बाद सामने आया मामला
कृषि आदान अनुदान के वितरण का यह मामला तब सामने आया, जब धाराशिव-कलंब के विधायक कैलास पाटील ने कृषि आयुक्तालय में शिकायत दर्ज कर आर्थिक अपराध शाखा से जांच और संबंधित अधिकारियों के निलंबन की मांग की। शिकायत के बाद विभागीय रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, लाभार्थी सूची, वितरण फाइलें और अन्य दस्तावेज मांगे गए, लेकिन कई अभिलेख उपलब्ध ही नहीं कराए गए। लातूर के जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी राजेंद्र कदम की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने उपविभागीय कृषि अधिकारियों के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों से जांच कराई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय अन्न सुरक्षा एवं पोषण अभियान के तहत गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की पुष्टि की।
