सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई के पश्चिम विभाग साइबर पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने ०२ अप्रैल से १८ अप्रैल २०२६ के बीच एक शिकायतकर्ता से १ करोड़ ६७ लाख ४० हजार रुपए ठगने के मामले में ७ आरोपियों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला भी है, जो फ्रॉड के पैसों को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी संभालती थी।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने अलग-अलग मोबाइल नंबर से शिकायतकर्ता को फोन किया। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कहा कि ‘आपके आधार कार्ड का मनी
लॉन्ड्रिंग केस में गलत इस्तेमाल हुआ है।’ इसके बाद व्हॉट्सऐप पर पुलिस लोगो वाला फर्जी लेटर और सुप्रीम कोर्ट की मोहर लगा नकली दस्तावेज भेजा। फिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बैंक खातों की जांच का हवाला देकर दो अलग-अलग खातों में १.६७ करोड़ रुपए जबरन ट्रांसफर करवा लिए।
३४ लाख रुपए कराए फ्रीज
पुलिस ने आरोपियों से २७ मोबाइल, २ लैपटॉप, ५ डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस, ६९३ सिम कार्ड, १० चेकबुक, २ पासबुक और २ एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। साथ ही विभिन्न बैंक खातों में ३४ लाख रुपए फ्रीज कराए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका
गिरफ्तार आरोपियों में संजय हेरालाल शाह सिम कार्ड-ओटीपी सप्लाई करता था। आरोपी महिला ने ४०.६० लाख रुपए की रकम ठिकाने लगाई। ऋषि रामचंद्र मीना टेक्निकल माहिर है। नौशाद फर्जी सिम सप्लायर था। खलीद सैफी कॉल रूट करता था और जगेश्वर महतो और जाबीर ने ९.९७ करोड़ की रकम अपने खातों में लेकर बांटी।
