-१०,००० करोड़ का कारोबार बंद होने का खतरा
-४० हजार कर्मचारी होंगे बेरोजगार!
-पुणे एमआईडीसी की बदहाली से उद्योगों का पलायन शुरू
रामदिनेश यादव / मुंबई
मर्सिडीज-बेंज, फॉक्सवैगन, स्कोडा और हुंडई जैसी दुनिया की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनियों के कारण देश-विदेश में पहचान बनानेवाली पुणे की चाकण एमआईडीसी अब सरकारी लापरवाही और बदहाल बुनियादी ढांचे की शिकार होती जा रही है। सड़कों पर जानलेवा गड्ढे, रोजाना घंटों लगनेवाला ट्रैफिक जाम और लगातार हो रहे हादसों से परेशान होकर यहां की लगभग १०० लघु एवं मध्यम औद्योगिक कंपनियां अपना कारोबार समेटने की तैयारी करते जा रही हैं। शुरुआत में यहां २० कंपनियों में तालाबंदी हुई और बाद में यह संख्या बढ़ती गई। इससे जहां लगभग १०,००० करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान होने की आशंका है, वहीं ४० हजार से अधिक लोगों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बेरोजगार होने की संभावना है। इन कंपनियों ने इसके लिए बाकायदा एक संगठन बनाया है और खंडाला एमआईडीसी में जमीन हासिल करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं।
बच्चों की फीस कैसे भरें, कर्ज कैसे चुकाएं?
नौकरी जाने की आशंका ने हजारों कर्मचारियों के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। कर्मचारियों का कहना है कि रोजाना आने-जाने में डेढ़ घंटे से भी अधिक समय सिर्फ ट्रैफिक में बर्बाद हो रहा है। इसका असर उनके परिवार और निजी जीवन पर भी पड़ रहा है। कर्मचारियों का सवाल है कि यदि कंपनियां बंद होकर दूसरी जगह चली गईं तो बच्चों की स्कूल फीस वैâसे भरी जाएगी? बैंक का कर्ज वैâसे चुकाया जाएगा? घर का खर्च कैसे चलेगा?
उद्योगों को सड़क नहीं, सिर्फ जाम और गड्ढे मिले!
चाकण औद्योगिक क्षेत्र को राज्य के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। देश-विदेश की बड़ी कंपनियों के साथ हजारों छोटे-बड़े उद्योग यहां काम करते हैं। लेकिन औद्योगिक विकास के अनुरूप सड़क और परिवहन व्यवस्था विकसित करने में प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हुआ है। उद्योगों के लिए कच्चा माल लाने और तैयार माल भेजने में लगातार देरी हो रही है। कर्मचारियों को रोजाना आने-जाने में घंटों सड़क पर फंसना पड़ता है। जगह-जगह गड्ढों और बेतरतीब यातायात के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
